- जेएसएससी द्वारा दस्तावेज वेरीफिकेशन में उम्मीदवारी रद्द किए जाने के आदेश को एकल पीठ ने किया था निरस्त
- महिला सुपरवाइजर के 444 पदों के लिए निकला था विज्ञापन
Ranchi News : महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले जेएसएससी की अपील पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने आज जेएसएससी की अपील पर सुनवाई की.
जेएसएससी ने हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट द्वारा आकांक्षा कुमारी एवं अन्य के मामले में 15 मई 2026 को पारित आदेश को हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील दाखिल कर चुनौती दी है. जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और अधिवक्ता जयप्रकाश ने पक्ष रखा. अब मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी.
महिला सुपरवाइजर नियुक्ति मामले में झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमिशन (जेएसएससी) द्वारा अभ्यर्थियों के दस्तावेज वेरिफिकेशन में त्रुटि निकालकर उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी. एकल पीठ ने जेएसएससी द्वारा प्रार्थियों के दस्तावेज वेरिफिकेशन के दौरान उनके उम्मीदवारी रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया था. साथ ही कोर्ट ने प्रार्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल कराने का आदेश जेएसएससी को दिया था.
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एकल पीठ में प्रार्थी का क्या था पक्ष
हाईकोर्ट की एकल पीठ में सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि महिला सुपरवाइजर के 444 पदों के लिए विज्ञापन निकला था. महिला सुपरवाइजर नियुक्ति के विज्ञापन और नियुक्ति नियमावली में कहीं यह नहीं लिखा था कि अभ्यर्थियों को सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी और होम साइंस में 3 वर्षीय ऑनर्स की डिग्री होना अनिवार्य है.
महिला सुपरवाइजर के पद पर नियुक्ति के लिए सिर्फ इन तीनों विषयों के साथ ग्रेजुएशन होना जरूरी था. प्रार्थियों ने तीनों विषयों में ऑनर्स डिग्री नहीं लिया है. लेकिन ग्रेजुएशन जरूर किया है, जिसमें उन्होंने तीन वर्ष तक उक्त तीनों विषयों की पढ़ाई जरूर की है.
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