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फीफा विश्व कप: ईरान के शामिल होने की संभावना अनसुलझा, अधर में मैक्सिको में मैच का मामला

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच फीफा विश्व कप फुटबॉल राजनीति के एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले ने हालात को मुश्किल और जटिल बना दिया है. जिसके चलते ईरान की फुटबॉल टीम और उसके विश्व कप अभियान पर इसका सीधा असर नजर आ रहा है.
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Lagatar Desk: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच फीफा विश्व कप फुटबॉल राजनीति के एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले ने हालात को मुश्किल और जटिल बना दिया है. जिसके चलते ईरान की फुटबॉल टीम और उसके विश्व कप अभियान पर इसका सीधा असर नजर आ रहा है.

 

इस बीच फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और ईरानी फुटबॉल अधिकारियों के बीच तुर्की में हुई बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ये बैठक ऐसे समय में हुई जब ईरान की विश्व कप भागीदारी को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे थे. हालांकि इस मुलाकात में सकारात्मक संकेत मिले, लेकिन ईरान का अमेरिका में जाकर खेलने का मुद्दा अब भी अनसुलझा है.
 

सरकारी स्तर पर यह संकेत दिए गए कि टीम विश्व कप में हिस्सा नहीं ले सकती या उसे अमेरिका जाने में मुश्किल हो सकती है. फीफा से यह भी मांग की गई कि ईरान के मैचों को किसी अन्य देश, खासकर मेक्सिको में स्थानांतरित कर दिया जाए. हालांकि फीफा ने साफ किया है कि टूर्नामेंट शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं होगा. ईरान को अमेरिका में ही अपने मैच खेलने होंगे.

 

फीफा अध्यक्ष इन्फेंटिनो ने भरोसा दिलाया है कि ईरान की टीम को सभी आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा दी जाएगी. ईरान की टीम ने भी मुश्किल हालातों के बीच तैयारी में जुटी है. सुरक्षा कारणों से जॉर्डन में प्रस्तावित अभ्यास मैचों को तुर्की के अंताल्या में शिफ्ट किया गया, जहां टीम ने नाइजीरिया और कोस्टा रिका के खिलाफ मैच खेले हैं. इन मैचों के दौरान खिलाड़ियों ने युद्ध के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन भी किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना.

 

विश्व कप शेड्यूल के तहत ईरान 10 जून तक एरिजोना के टक्सन स्थित ट्रेनिंग कैंप में पहुंचेगा. टीम पहला मैच 15 जून को लॉस एंजिल्स में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलेगी. उसके बाद टीम की बेल्जियम और मिस्र जैसी मजबूत टीमों से भिड़ंत होगी. हालांकि वीजा से जुड़ी समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं, जिसक चलते टीम के कुछ अधिकारियों को अमेरिका में प्रवेश नहीं मिल पाया है.फीफा के लिए एक बड़ी चुनौती है यह कि वह खेल की निष्पक्षता बनाए रखते हुए सभी टीमों के लिए सुरक्षित और समान माहौल सुनिश्चित करे.

 

 

 

 

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