Ranchi : राज्य में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत 14 जिलों के प्रभावित प्रखंडों में 10 फरवरी 2026 से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम चलाया जा रहा है.इस अभियान के तहत लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है.
यह अभियान रांची, गुमला, देवघर, रामगढ़, पूर्वी सिंहभूम, कोडरमा, गिरिडीह, पाकुड़, साहेबगंज, गढ़वा, लोहरदगा, बोकारो, धनबाद और सिमडेगा जिलों के प्रभावित प्रखंडों में संचालित हो रहा है.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी और आसान उपाय है. लगातार पांच वर्षों तक साल में एक बार दवा खाने से इस रोग से बचा जा सकता है. यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और प्रशिक्षित दवा प्रशासकों तथा स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर लोगों को खिलाई जा रही है.
अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार की ओर से व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. जिलों में दीवार लेखन, पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाए गए हैं. स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
जिन क्षेत्रों में साक्षरता कम है वहां रात्रि चौपाल, ऑडियो-वीडियो, ग्राम सभा, नुक्कड़ नाटक, माइकिंग और डुगडुगी जैसे माध्यमों से लोगों को जागरूक किया जा रहा है. साथ ही कई प्रसिद्ध लोगों की अपील भी लोगों तक पहुंचाई जा रही है.स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पूरे देश में वर्ष 2004 से यह कार्यक्रम चल रहा है. पहले लोगों में इस अभियान को लेकर भरोसा कम था, लेकिन अब सोशल मीडिया और जागरूकता कार्यक्रमों के कारण लोगों की भागीदारी बढ़ी है.

अब लोग फाइलेरिया की जांच और दवा सेवन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं.10 फरवरी से अब तक लक्षित लगभग डेढ़ करोड़ लोगों में से 86.89 प्रतिशत आबादी फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कर चुकी है. इससे बड़ी संख्या में लोगों को इस बीमारी के खतरे से बचाया जा सका है.
एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कुछ नए फैसले लिए गए हैं. 26 फरवरी से 10 मार्च तक छूटे हुए लोगों और त्योहार के दौरान घर आने वाले प्रवासियों को कैंप लगाकर दवा खिलाई जाएगी.
रमजान के महीने को देखते हुए और दिन में घर से बाहर रहने वाले लोगों के लिए चिन्हित क्षेत्रों में शाम के समय इवनिंग एमडीए के तहत दवा दी जाएगी. इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों तथा दुकानों में भी दवा प्रशासक जाकर लोगों को दवा खिलाएंगे.
अब तक राज्य के 38 प्रखंड फाइलेरिया उन्मूलन के पहले चरण तक पहुंच चुके हैं. रांची जिले के 14 प्रखंडों में से केवल सोनाहातु, तमाड़ और कांके प्रखंड ही अभी फाइलेरिया प्रभावित श्रेणी में बचे हैं.सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक देश को फाइलेरिया मुक्त बनाना है. झारखंड में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनभागीदारी के साथ अभियान लगातार जारी है, ताकि इस बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सके.


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