Ranchi : झारखंड अग्निशमन सेवा ने राज्य के सभी अस्पतालों के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की है. नए निर्देशों के अनुसार अस्पतालों के सामने कम से कम 12 मीटर चौड़ी सड़क और पर्याप्त खुली जगह होना जरूरी होगा, ताकि आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बिना किसी बाधा के पहुंच सके.
निर्देश में कहा गया है कि अस्पताल के हर फ्लोर और संवेदनशील क्षेत्रों में फायर एक्सटिंग्विशर लगाना और उसकी नियमित जांच करना प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी. इसके साथ ही बिजली के पैनल और भारी मशीनों जैसे MRI और X-ray की भी समय-समय पर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शॉर्ट सर्किट के खतरे को कम किया जा सके.
सरकार ने आपातकालीन निकास मार्ग को लेकर भी सख्ती दिखाई है. कहा गया है कि इमरजेंसी एग्जिट को हमेशा खाली रखा जाए. वहां किसी तरह का सामान, बेड या कचरा रखने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
अस्पतालों में अब हर महीने फायर ड्रिल कराना अनिवार्य होगा. इससे नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रशिक्षण मिल सकेगा. साथ ही पूरे परिसर में स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म सिस्टम को हमेशा सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि समय रहते खतरे की जानकारी मिल सके.
ज्वलनशील पदार्थ जैसे ऑक्सीजन सिलेंडर, स्पिरिट और अन्य रसायनों के सुरक्षित भंडारण के लिए भी विशेष मानकों का पालन करना होगा. अस्पताल प्रबंधन को एक विस्तृत इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्लान तैयार करने के लिए कहा गया है, जिसमें वेंटिलेटर पर मौजूद और दिव्यांग मरीजों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था शामिल होगी.
इसके अलावा हर कॉरिडोर में अंधेरे में चमकने वाले एग्जिट साइन और निकास मार्ग का नक्शा लगाना अनिवार्य किया गया है. नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
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