- विशेष विमान से परखी गई सिग्नल की सटीकता
- पायलटों की कैसे मदद करती है यह तकनीक
- सुरक्षित हवाई यातायात की रीढ़ है सीएनएस विभाग
Ranchi News: राजधानी रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर कम दृश्यता और खराब मौसम में भी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की जा सकेगी. इसके लिए शनिवार को एयरपोर्ट पर एक अहम तकनीकी जांच की गई.
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की फ्लाइट इंस्पेक्शन यूनिट (FIU) ने इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और पीएपीआई (PAPI) प्रणाली का सफल फ्लाइट कैलिब्रेशन किया.
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फ्लाइट कैलिब्रेशन के दौरान एक विशेष विमान के जरिए लैंडिंग प्रणालियों के संकेतों और उनकी कार्यक्षमता को परखा गया. इस नियमित जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जमीन पर लगे उपकरण हवा में पायलटों को सटीक जानकारी दे रहे हैं. सर्दियों में कोहरे और खराब मौसम के दौरान यह प्रणाली विमानों को सुरक्षित उतारने में सबसे अहम भूमिका निभाती है.
इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) पायलट को विमान रनवे की सही दिशा में लाने और उचित ऊंचाई व कोण से लैंडिंग कराने के लिए संकेत देता है. इसके दो मुख्य हिस्से होते हैं.
पहला 'लोकलाइजर' विमान को रनवे की सीध में रखता है, जबकि दूसरा 'ग्लाइड पाथ' सही ऊंचाई और कोण से नीचे उतरने में मदद करता है. इसके अलावा रनवे के किनारे लगी पीएपीआई (PAPI) की विशेष लाइटें पायलट को बताती हैं कि विमान लैंडिंग के समय सही ऊंचाई पर है या नहीं.
एयरपोर्ट का सीएनएस (कम्युनिकेशन, नेविगेशन एंड सर्विलांस) विभाग सुरक्षित हवाई संचालन की रीढ़ माना जाता है. यह विभाग पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के बीच संपर्क बनाए रखने का काम करता है.
साथ ही यह विमानों को सही दिशा दिखाने और रडार के जरिए उनकी लगातार निगरानी भी सुनिश्चित करता है. इस सफल कैलिब्रेशन के बाद रांची एयरपोर्ट पर हवाई परिचालन और अधिक सुरक्षित हो गया है. इस अभियान में रांची एयरपोर्ट के सीएनएस प्रभारी अविनाश सोरेंग के नेतृत्व में पूरी टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई.
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