- जामताड़ा में प्रशासन की नाक के नीचे अवैध बालू का बड़ा खेल
- जेसीबी-लोडर से नदी की खुदाई
- दर्जनों हाईवा से दूसरे राज्यों तक भेजी जा रही खेप
- टास्क फोर्स की कार्रवाई पर सवाल
Jamtara News : "मांझीआः मेद् लुटुर बनुःखान, अतु रे कुळुई रोंगोःआ" यह संथाली कहावत जामताड़ा में सही साबित हो रही है. इसका अर्थ है कि यदि मांझी (गांव के प्रमुख/प्रशासन) की आंख और कान बंद हों, तो पूरे गांव की फसल खरगोश (या जंगली जानवर) चर जाएंगे.
दरअसल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की रोक के बावजूद अजय नदी से बालू का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है. नदी से जेसीबी, लोडर और अन्य मशीनों से दिन-रात बालू निकाले जा रहे हैं. अब यह सिर्फ नियमों की अनदेखी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने जिला प्रशासन, पुलिस और गठित टास्क फोर्स की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जिला प्रशासन ने अवैध खनन और परिवहन रोकने के लिए बाकायदा टास्क फोर्स गठित कर रखी है. इसके बाद भी नदी में भारी मशीनों से की जा रही खनन पर प्रशासन अपनी आंख बंद कर रखा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अजय नदी के कई घाटों पर बालू का अवैध कारोबार संगठित तरीके से चल रहा है. नदी की धारा और तलहटी को मशीनों से काटकर बालू निकाला जा रहा है और फिर उसे हाइवा के जरिए दूसरे इलाकों में भेजा जा रहा है.

17 अगस्त सुबह 10.19 मिनट पर अजय नदी की तस्वीर
NGT की रोक बेअसर, नदी में गरज रही जेसीबी
बारिश के मौसम में नदी से बालू उठाव पर रोक के बावजूद अजय नदी के विभिन्न हिस्सों में मशीनों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आ रही हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, पाथरघट्टा, महेशमुंडा, बांखेत, बागकुड़ी समेत कई घाट कथित अवैध बालू खनन के केंद्र बन गए हैं.
सबसे गंभीर मामला इस खेल में नदी में सिर्फ ट्रैक्टरों से बालू उठाने तक सीमित नहीं है. जेसीबी और लोडर के जरिए बड़े पैमाने पर बालू निकाला जा रहा है. नदी में बालू छानने के लिए मशीनें भी लगाई गई हैं. इससे यह सवाल उठने लगा है कि जब NGT की रोक लागू है तो इतनी बड़ी मशीनरी नदी तक पहुंची कैसे?
साथ ही मशीनों को वहां काम करने की अनुमति किसने दी और इतने बड़े पैमाने पर बालू लदे वाहनों का परिचालन प्रशासन की नजर से कैसे बच रहा है?

नदी से बालू के खनन के लिए खड़ी गाड़ियां
50-60 हाइवा प्रतिदिन निकलने का दावा
स्थानीय लोगों के अनुसार, अजय नदी से प्रतिदिन 60 से 70 हाईवा तक बालू निकाले जाने का दावा किया जा रहा है. यह बालू जामताड़ा से पश्चिम बंगाल के धुलियान, मालदा, मुरारई, रामपुरहाट, मुर्शिदाबाद और बहरामपुर समेत कई इलाकों तक भेजा जाता है.

बालू के खनन के लिए नीचे उतरती गाड़ियां
प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा खेल
जिले में अवैध खनन और खनिज परिवहन पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने टास्क फोर्स गठित कर रखी है. इसमें प्रशासन, पुलिस, खनन विभाग, परिवहन विभाग समेत कई विभागों के अधिकारी शामिल हैं. इसके बावजूद यदि नदी में लगातार जेसीबी और लोडर चल रहे हैं और दर्जनों हाईवा बालू लेकर जिले से बाहर जा रहे हैं, तो सवाल सीधे टास्क फोर्स की सक्रियता पर उठता है. नदी से हो रहे अबैध बालू खनन टास्क फोर्स को दिखाई नहीं दे रही है.

नदी तट के किनारे खनन के लिए आती मशीनें
सत्ता के गलियारों तक पहुंचा मामला, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
जिस इलाके में कथित अवैध खनन हो रहा है, वह झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो के विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है. जामताड़ा जिले से ही राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी आते हैं. ऐसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिले में NGT की रोक के बावजूद बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी रहने से प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, दिन के समय नदी से बालू निकाला जाता है और रात या तड़के सुबह भारी वाहनों से उसका परिवहन किया जाता है.

बालू के परिवहन के लिए खड़ा है ट्रैक्टर
बारिश में बालू खनन से पर्यावरण पर दोहरा संकट
बरसात के मौसम में नदी से बड़े पैमाने पर बालू उठाव सिर्फ अवैध खनन का मामला नहीं है. इससे नदी की प्राकृतिक संरचना, जल प्रवाह, तटों की स्थिरता, जलीय जीवों और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ सकता है. मशीनों से नदी की तलहटी में बड़े पैमाने पर खुदाई होने से नदी के प्राकृतिक स्वरूप में बदलाव और कटाव का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में नियमों और पर्यावरणीय प्रतिबंधों की अनदेखी भविष्य में स्थानीय आबादी के लिए भी परेशानी का कारण बन सकती है.

अजय नदी की तस्वीर
लगातार खबरों के बावजूद नहीं थमा खनन
अजय नदी में मशीनों से बालू निकालने और अवैध खनन की खबरें लगातार न्यूज ने पहले भी प्रकाशित कर चुका है. खबर प्रकाशित होने के बाद एक-दो दिन मामला शांत होता है. इसके बाद फिर से अवैध खनन की गतिविधियां शुरू जाती हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की जानकारी के बिना इतने बड़े पैमाने पर यह कारोबार संभव नहीं है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है.
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डीसी-एसपी से मांगा गया पक्ष
मामले में जामताड़ा उपायुक्त आलोक कुमार और पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया और मैसेज पर सक्ष्य भी भेजा गया. खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका. उनका पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा.
इससे पहले जब लगातार ने खबर प्रकाशित की थी तो उपायुक्त का पक्ष लिया था. उस समय उन्होंने अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी. इसके बावजूद नदी में कथित तौर पर खनन जारी रहने से प्रशासन के दावों और जमीन पर स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
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