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अजय नदी पर बालू माफियाओं का कब्जा! NGT की रोक बेअसर, खनन रुका मगर नदी बने हैं बालू के पहाड़

जामताड़ा की अजय नदी इन दिनों अवैध बालू कारोबार का बड़ा केंद्र बनी हुई है. एनजीटी की रोक के बावजूद नदी से बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन और परिवहन का खेल धड़ल्ले से चलता रहा. बालू लदे डंपर बिना चलान के ही प्रशासनिक महका में बैठे आला अधिकारियों के सामने से गुजरता है, लेकिन रोका नहीं जाता है.
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  • रोजाना 50-60 हाइवा बालू उठाव का दावा, बंगाल तक पहुंच रही खेप, घोष बाबू और महतो जी जल रहा अवैध कारोबर

Jamtara: जामताड़ा की अजय नदी इन दिनों अवैध बालू कारोबार का बड़ा केंद्र बनी हुई है. एनजीटी की रोक के बावजूद नदी से बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन और परिवहन का खेल धड़ल्ले से चलता रहा. बालू लदे डंपर बिना चलान के ही प्रशासनिक महका में बैठे आला अधिकारियों के सामने से गुजरता है, लेकिन रोका नहीं जाता है. अवैध बालू खनन को लेकर जब लगातार चर्चा होने लगी और खबरें सामने आने लगी तो प्रशासन हरकत में आया और पिछले 3-4 दिनों से बालू परिवहन रुका हुआ है. हालांकि नदी किनारे बने अवैध डंप में बालू बढ़ता जा रहा है. कहा जा रहा है कि एक बार फिर से पूरी फिल्डिंग सजने के बाद एक बार पुनः अवैध कारोबार शुरु करने की तैयारी की जा रही है.

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि खनन पूरी तरह बंद है तो फिर नदी किनारे लगातार बढ़ रहे बालू के विशाल डंप किसके हैं और इन्हें किसके संरक्षण में जमा किया जा रहा है? स्थानीय लोगों के अनुसार पाथरघट्टा, महेशमुंडा, बांखेत, बागकुड़ी सहित अजय नदी के कई घाटों से बालू निकालकर बड़े पैमाने पर स्टॉक किया गया है. 

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स्थानीय लोगों का दावा है कि अजय नदी से प्रतिदिन 50 से 60 हाइवा बालू निकाला जाता रहा है. यह बालू जामताड़ा से पश्चिम बंगाल के धुलियान, मालदा, मुरारई, रामपुरहाट, मुर्शिदाबाद और बहरामपुर सहित कई इलाकों तक भेजा जाता है. कुछ स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि इसी नेटवर्क के माध्यम से बालू की खेप बांग्लादेश तक पहुंचाई जाती है. 

 

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जमा किए गए बाली के ढेर


जिले में अवैध खनन और खनिज परिवहन पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने टास्क फोर्स का गठन कर रखा है. इस टास्क फोर्स में प्रशासन, पुलिस, खनन विभाग, परिवहन विभाग सहित कई विभागों के अधिकारी शामिल हैं. इसके बावजूद लंबे समय तक अवैध खनन और परिवहन जारी रहना टास्क फोर्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. 

 

घोष बाबू और महतो जी के नाम की चर्चा

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि अजय नदी से बालू खनन और उसके परिवहन का पूरा नेटवर्क कथित तौर पर घोष बाबू और महतो जी के संरक्षण में चल रहा है. घाटों से लेकर बालू की स्टॉकिंग और भारी वाहनों के जरिए उसके परिवहन तक पूरी व्यवस्था बेहद संगठित तरीके से चलाई जाती है.

 

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नदी किनारे जमा बालू के ढेर

 

नाला प्रखंड के कई घाट भी बने अवैध खनन के केंद्र

अजय नदी के अलावा नाला प्रखंड के कास्ता, बागकुड़ी, महेशमुंडा सहित कई क्षेत्रों में भी अवैध बालू खनन और उठाव की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन के समय नदी से बालू निकाला जाता है, जबकि रात के अंधेरे और तड़के सुबह भारी वाहनों के माध्यम से उसका परिवहन किया जाता है, ताकि प्रशासनिक कार्रवाई से बचा जा सके. इस पूरे मामले को लेकर जिला खनन पदाधिकारी से पक्ष जानने के लिए फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया. पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जायेगा.


प्रशासन के सामने कई सवाल

जब एनजीटी की रोक लागू है, टास्क फोर्स सक्रिय है और प्रशासन लगातार निगरानी का दावा करता है, तो फिर नदी किनारे अवैध बालू के विशाल डंप कैसे तैयार हो गए? इन डंपों की जांच कब होगी? इनके पीछे कौन लोग हैं? और अवैध खनन व परिवहन में शामिल लोगों पर प्रशासन कब तक कार्रवाई करेगा? इन सवालों के जवाब का इंतजार पूरे इलाके को है.

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