Ranchi : राज्यभर में छात्रों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के विरोध प्रदर्शन के बाद ‘क्लस्टर सिस्टम’ पर फिलहाल रोक लगने के संकेत मिले हैं. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव राहुल पुरवार ने छात्रों से बातचीत के दौरान माना कि इस व्यवस्था को लागू करने में संवाद की कमी रही और छात्रों की आपत्तियों पर 10 से 15 दिनों के भीतर समाधान निकालने का आश्वासन दिया.
अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग कॉलेजों में जाने होंगे
क्लस्टर सिस्टम के तहत अलग-अलग कॉलेजों को अलग-अलग विषयों की विशेषज्ञता देने की योजना थी. छात्रों का आरोप है कि इससे गरीब, ग्रामीण, आदिवासी, मूलवासी और दलित छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूर-दराज के कॉलेजों में जाना पड़ेगा.
इसी के विरोध में छात्रों ने काला पट्टा बांधकर प्रदर्शन किया और इसे “काला कानून” बताया. प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने “जब क्लस्टर सिस्टम से परिसर हो जाएगा दूर, तो बेटियां हो जाएंगी शिक्षा से कोसों दूर” जैसे नारे लगाए. छात्र संगठनों का कहना है कि सरकार बिना छात्रों से बातचीत किए एसी कमरों में बैठकर शिक्षा नीति थोप रही है और यह सरकारी विश्वविद्यालयों को कमजोर कर निजी विश्वविद्यालयों को बढ़ावा देने की साजिश है.
सचिव ने दिया आश्वासन
विरोध के बाद विभागीय सचिव ने कहा कि छात्रों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नियमों में संशोधन किया जाएगा और उनकी बात शिक्षा मंत्री तक पहुंचाई जाएगी. उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा स्वरूप में क्लस्टर सिस्टम लागू नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसे अगले सत्र से बेहतर तरीके से लागू करने पर विचार होगा. हालांकि छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी हुई तो आंदोलन और उग्र होगा.
एडमिशन और कक्षाओं पर बड़ा फैसला
विभाग ने स्पष्ट किया है कि क्लस्टर सिस्टम विवाद का असर नामांकन प्रक्रिया पर नहीं पड़ेगा. एडमिशन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और 31 जुलाई तक सभी दाखिले पूरे किए जाएंगे. अगस्त के पहले सोमवार से कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी.
6-8 महीने में होंगे छात्र संघ चुनाव
छात्रों को छात्र संघ चुनाव को लेकर भी बड़ी राहत मिली है. विभागीय सचिव ने बताया कि चुनाव के लिए नया एक्ट तैयार हो चुका है और इसके परिनियम बनाए जा रहे हैं. सरकार ने संकेत दिया है कि अगले 6 से 8 महीनों के भीतर छात्र संघ चुनाव कराए जाएंगे. इसके लिए जल्द ही लिंगदोह कमेटी का गठन किया जाएगा.
अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि विश्वविद्यालयों में छात्र प्रतिनिधियों का चयन “सेलेक्शन” नहीं बल्कि “इलेक्शन” के जरिए ही होगा.
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