में 35 करोड़ का जमीन घोटाला, पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
ऐसे किया गया फर्जीवाड़ा
बंदोबस्त कार्यालय से दो कर्मचारी राजेंद्र यादव और पप्पू यादव को जमीन का सर्वे करने अप्रैल 2021 में मांडू भेजा गया था. सर्वे के बाद ग्रामीणों ने रामगढ़ और हजारीबाग डीसी सहित अन्य पदाधिकारियों को ज्ञापन सौंप कर दोनों पर 35 करोड़ रुपए मूल्य की 28.43 एकड़ जमीन खुद और सगे-संबधियों के नाम करा लेने का आरोप लगाया था. बताया था कि यह गड़बड़ी कोरोना काल में की गई. ग्रामीणों ने जानकारी दी थी कि बंदोबस्त पदाधिकारी हजारीबाग के आदेश पर अप्रैल 2021 में कर्मचारी राजेंद्र यादव और पप्पू यादव के नेतृत्व में टीम जमीन का सर्वे करने रामगढ़ के मांडू अंचल स्थित कोतरे और पचंडा गई थी. सर्वे के दौरान दोनों ने गैर मजरुआ जमीन को अपने नाम करा लिया. इनमें राजेंद्र यादव ने 11.08 करोड़ मूल्य की नौ एकड़ और पप्पू गोप ने 23.92 करोड़ रुपए की 18 एकड़ जमीन अपने नाम करा ली. यह हेराफेरी सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी मनोज कुमार दीक्षित और पेशकार विनोद शाह के कार्यकाल में हुई. ग्रामीणों के आवेदन पर जब जांच हुई, तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ.जीएम लैंड की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर है रोक
मांडू के कोतरे में बंदोबस्त कर्मचारियों ने जमीन का सर्वे किया था. यहां साविक खाता नंबर-1 व 6 की जमीन गैरमजरुआ है. इस प्रतिबंधित भूमि की खरीद-बिक्री नहीं हो सकती. यह प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सरकार की संपत्ति है, परंतु कर्मचारियों ने जमीन माफियाओं से मिलकर प्रतिबंधित जमीन अपने नाम कर ली.खोला जाना है कोल ब्लॉक, मुआवजे और नौकरी के लिए खेल
कोतरे-पचंडा के ग्रामीणों के अनुसार वहां कोल ब्लॉक का आवंटन हुआ है. यहां कोलियरी खुलने वाली है. बताया जा रहा है कि इसलिए जमीन की हेराफेरी कर अपने नाम चढ़ाया जा रहा है, ताकि कोल कंपनी से नौकरी और मुआवजा लिया जा सके. इसे भी पढ़ें : पुलिसकर्मियों">https://lagatar.in/deadly-attack-on-sons-of-policemen-three-injured-two-referred/">पुलिसकर्मियोंके बेटों पर जानलेवा हमला, तीन घायल, दो रिम्स रेफर [wpse_comments_template]

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