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राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे पूर्व सांसद डॉ रामविलास दास वेदांती नहीं रहे

राम विलास वेदांती का पार्थिव शरीर देर शाम अयोध्या पहुंचेगा.  मंगलवार को अंतिम संस्कार किया जायेगा.  अहम बात यह है कि जिन नेताओं पर बाबरी विध्वंस का आरोप लगे थे, उनमें वेदांती भी शामिल थे.
 

 Ayodhya : राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति को धार देने वाले पूर्व सांसद डॉ रामविलास दास वेदांती नहीं रहे. आज सोमवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली. अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें रींवा स्थित  संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल  ले जाया गया था, जहां उनका निधन हो गया.   


उन्हें ब्लड प्रेशर की शिकायत पर 13 दिसम्बर को शाम भर्ती कराया गया था. अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है


खबर है कि राम विलास वेदांती का पार्थिव शरीर देर शाम अयोध्या पहुंचेगा.  मंगलवार को अंतिम संस्कार किया जायेगा.  अहम बात यह है कि जिन नेताओं पर बाबरी विध्वंस का आरोप लगे थे, उनमें वेदांती भी शामिल थे. 


सात अक्टूबर 1958 को मध्य प्रदेश के रीवा में जन्मे डॉ. रामविलास वेदांती ने 12 साल की उम्र में संन्यास ले लिया था. वह घर-परिवार छोड़कर अयोध्या आ गये. अयोध्या में हनुमानगढ़ी के महंत अभिराम दास ने उन्हें शिष्य बना लिया था, रामविलास वेदांती संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे. वेदांती सरयू किनारे स्थित हिंदू धाम पर रहते थे.


राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहने के बाद  उन्होंने राजनीति में कदम रख दिया.  भाजपा ने सबसे पहले उन्हें   मछली शहर सीट से 1996 में प्रत्याशी बनाया. वेदांती लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. वे 1996 और 1998 में दो बार सांसद रहे .

 


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