Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने बीआईटी सिंदरी के चार असिस्टेंट प्रोफेसरों (याचिकाकर्ताओं) को राहत देते हुए वर्ष 2019 से ही करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति देने का निर्देश दिया है. याचिकाकर्ताओं में रवि शंकर प्रसाद, राजेन कुमार नायक, उज्ज्वल कुमार नायक और अभय ज्ञान पी. कुजूर शामिल हैं.
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कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया में हुई मामूली तकनीकी त्रुटियों के आधार पर चार साल से चली आ रही पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर पदोन्नति अधिसूचित करने और पात्रता की तिथि से सभी परिणामी लाभ एवं वेतन का एरियर देने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने याचिकाकर्ताओं रवि शंकर प्रसाद एवं अन्य के मामले में फैसला सुनाया.
2019 में शुरू हुई थी प्रक्रिया
याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि CAS के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर और ग्रेड-पे 8000 से 9000 रुपये करने की प्रक्रिया 25 जून 2019 को शुरू हुई थी. बीआईटी सिंदरी ने पात्र शिक्षकों से आवेदन मांगे. कॉलेज स्तर पर आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद 16 जनवरी 2020 को पात्र उम्मीदवारों के नाम विभाग को भेजे गए.
इसके बाद विभाग ने 5 फरवरी 2021 को स्क्रीनिंग कमेटी गठित कर नामों की जांच की. हालांकि बाद में यह आपत्ति उठायी गयी कि कमेटी में डायरेक्टर, टेक्निकल एजुकेशन शामिल नहीं थे. 18 फरवरी 2022 को कमेटी का पुनर्गठन कर दोबारा स्क्रीनिंग करने का निर्देश दिया गया. इसके बावजूद मामला विभागीय चयन समिति के समक्ष भेज दिया गया और 20 अगस्त 2022 को इंटरव्यू हुआ. समिति ने उम्मीदवारों के नामों की अनुशंसा कर दी.
चार साल तक निर्णय लंबित रहा
हाईकोर्ट ने कहा कि AICTE रेगुलेशन 2012 के क्लॉज 2.9 के अनुसार स्क्रीनिंग कम इवैल्यूएशन कमेटी की ओर से उम्मीदवारों के नाम की अनुशंसा किये जाने के साथ चयन प्रक्रिया पूरी हो गई थी. इसके बाद विभाग को केवल निर्णय लेकर पदोन्नति अधिसूचित करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. इसके बजाय मामला करीब दो साल तक लंबित रखा गया.
कोर्ट ने कहा कि विभाग द्वारा बतायी गयी पहली कमी उस स्तर की थी, जहां नियमों में अलग से विभागीय स्क्रीनिंग कमेटी गठित करने का प्रावधान ही नहीं था. कॉलेज स्तर पर उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें विभाग को भेजा जाना था.
'मानवीय त्रुटि के कारण पूरी चयन प्रक्रिया रद्द नहीं हो सकती'
कोर्ट ने चयन समिति की अनुशंसा में भी तकनीकी गलती पायी. तीन याचिकाकर्ताओं के नाम के सामने 'Recommended/Not Recommended' वाला कॉलम खाली था. हालांकि समिति की अनुशंसा के कवरिंग पेज पर 17 उम्मीदवारों को ग्रेड-पे 8000 से 9000 और असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के लिए अनुशंसित किये जाने का उल्लेख था. इन 17 नामों में तीनों याचिकाकर्ता भी शामिल थे.
कोर्ट ने कहा कि यह रिकॉर्ड पर स्पष्ट मानवीय त्रुटि है और इससे पूरी चयन प्रक्रिया की वैधता समाप्त नहीं होती. चौथे याचिकाकर्ता के नाम के सामने तो 'Recommended' भी स्पष्ट रूप से दर्ज था.
नये नियम लागू होने के बाद भी पुरानी प्रक्रिया सुरक्षित
राज्य सरकार ने 2024 में झारखंड टेक्निकल एजुकेशन सर्विस रूल्स लागू किये, जिनमें AICTE के 2019 के नियमों को अपनाया गया. सरकार का तर्क था कि पुरानी प्रक्रिया में विसंगतियां थीं और अब नये नियमों के तहत नयी चयन प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए.
हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि 2024 के नियमों के क्लॉज 18 में पहले की गयी कार्रवाई को सुरक्षित रखा गया है. इसलिए 2019 में शुरू होकर 20 अगस्त 2022 को अनुशंसा के साथ पूरी हो चुकी CAS प्रक्रिया भी सुरक्षित रहेगी.
अधिकारियों की गलती का खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतना होगा
कोर्ट ने टिप्पणी की कि चयन प्रक्रिया चार साल तक चली और याचिकाकर्ताओं ने हर चरण में नियमों के अनुसार भाग लिया. जिन विसंगतियों का हवाला दिया गया, वे मुख्य रूप से संबंधित अधिकारियों के स्तर पर हुई थीं. ऐसी त्रुटियों के लिए याचिकाकर्ताओं को फिर से वर्षों लंबी चयन प्रक्रिया से गुजरने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष रही और इसमें समान अवसर और नियमों का पालन किया गया. इसलिए इसे बचाया जाना चाहिए, न कि छोटी तकनीकी त्रुटियों के आधार पर पूरी प्रक्रिया को समाप्त किया जाए.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि चारों याचिकाकर्ताओं को पात्रता की तिथि, यानी वर्ष 2019 से, ग्रेड-पे 8000 से 9000 रुपये और असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के समकक्ष पदोन्नति का लाभ दिया जाए. इसके साथ वेतन का बकाया और अन्य सभी परिणामी लाभ भी दिये जाएं. आदेश की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर आवश्यक आदेश जारी करना होगा.
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