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करेले से स्ट्रॉबेरी तक : ड्रिप सिंचाई बनी महिला किसानों के बदलाव की मिसाल

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश पर राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने वाली झिमड़ी परियोजना को दो वर्ष का विस्तार दिया गया है.अब 30 हजार से अधिक महिला किसान इस योजना से लाभान्वित होंगी. परियोजना के तहत 28,298 माइक्रो ड्रिप इरिगेशन सिस्टम स्थापित किए गये है. जिससे 2,829 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिल रहा है.
 
  • मुख्यमंत्री के निर्देश पर झिमड़ी परियोजना को मिला दो वर्ष का विस्तार, 30 हजार से अधिक महिला किसान होंगी लाभान्वित
  • फसल उत्पादकता में 246% सुधार, 28 हजार से अधिक माइक्रो ड्रिप सिस्टम स्थापित

Ranchi : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश पर राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने वाली झिमड़ी परियोजना को दो वर्ष का विस्तार दिया गया है.अब 30 हजार से अधिक महिला किसान इस योजना से लाभान्वित होंगी. परियोजना के तहत 28,298 माइक्रो ड्रिप इरिगेशन सिस्टम स्थापित किए गये है. जिससे 2,829 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिल रहा है.

 

साथ ही 13,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण. इसके तहत 13,289 पॉली नर्सरी हाउस व 21,871 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां लगाये गये है. 15 सोलर कोल्ड चैंबर, 198 इम्प्लीमेंट बैंक और 14 MPCC चालू किया गया है.

 

पूजा सोरेन की सफलता : करेले से करोड़ों तक

दुमका की पूजा सोरेन पहले सिंचाई और पूंजी के अभाव में खेती करने को मजबूर थीं. झिमड़ी परियोजना से जुड़कर उन्होंने ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाई और करेले, मिर्च और स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की. आज उनकी सालाना आय 4 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है.

 

विनीता देवी की कहानी : फ्रेंच बीन्स से मिली नयी राह

खूंटी के कर्रा प्रखंड की विनीता देवी ने 2022 में ड्रिप सिंचाई से पहली बार फ्रेंच बीन्स की खेती की. मात्र 12,300 रुपये की लागत पर उन्होंने 51,540 रुपये का मुनाफा कमाया. अब वे करेले की खेती कर रही हैं और सालाना 1.20 लाख रुपये कमा रही हैं.

 

नगड़ी की मधुबाला बनीं 'लखपति दीदी'

रांची के नगड़ी प्रखंड की मधुबाला देवी ने 25 डिसमिल भूमि पर आधुनिक तकनीक से सब्जियों की खेती शुरू की. अब उनकी सालाना आय करीब 2 लाख रुपये हो गई है और वे 'लखपति दीदी' की सूची में शामिल हो चुकी हैं.

 

खेती में क्रांतिकारी बदलाव

ड्रिप सिंचाई से किसानों की आय दोगुनी हुई है और फसल उत्पादकता 536 किलो से बढ़कर 1,318 किलो प्रति 0.1 हेक्टेयर हो चुकी है. सब्जियों और नकदी फसलों ने किसानों को आत्मनिर्भर बना दिया है.

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