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गुरु से मेंटर तक, बदलते दौर में बदलते गए शिक्षक के रूप, लेकिन सीखने की परंपरा आज भी वही

Ranchi News : आज शिक्षक का रूप भले ही बदल गया हो, लेकिन उनकी भूमिका का मूल उद्देश्य अब भी वही है - ज्ञान देना, गलतियों से सीखने की राह दिखाना और विद्यार्थी को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए तैयार करना.
 
प्रतीकात्मक चित्र

Ranchi News : 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है. यह दिन सिर्फ स्कूल-कॉलेज में पढ़ाने वाले शिक्षकों को धन्यवाद देने का नहीं, बल्कि उन सभी लोगों को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने किसी न किसी रूप में हमें सीखने और आगे बढ़ने की राह दिखाई है.

 

भारतीय परंपरा में सबसे पहले गुरु का स्थान आता है. गुरु केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते थे, बल्कि जीवन जीने का तरीका, संस्कार और सही-गलत की समझ भी देते थे. गुरु-शिष्य परंपरा में शिक्षा का मतलब सिर्फ परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करना था.

 

समय के साथ शिक्षा का स्वरूप बदला और गुरु के कई नए रूप सामने आए. स्कूलों में पढ़ाने वाले को शिक्षक और अध्यापक कहा जाने लगा. कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने वाले प्राध्यापक कहलाए. किसी खास विषय या कौशल की ट्रेनिंग देने वाले प्रशिक्षक कहलाते हैं, जबकि आज के दौर में छात्रों और युवाओं को करियर व व्यक्तिगत विकास में मार्गदर्शन देने वाले मेंटर की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हो गई है.

 

कौन-कौन हैं हमारे शिक्षक?

गुरु - जो जीवन की दिशा और संस्कार देते हैं.

आचार्य - जो शिक्षा के साथ आचरण और व्यवहार की सीख देते हैं.

अध्यापक - जो किसी विषय का व्यवस्थित ज्ञान देते हैं.

शिक्षक - जो पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में भी भूमिका निभाते हैं.

प्राध्यापक - उच्च शिक्षा संस्थानों में विषय और शोध की गहरी समझ देने वाले शिक्षक.

प्रशिक्षक - किसी खास कौशल, तकनीक या कला को सिखाने वाले विशेषज्ञ.

मेंटर - जो पढ़ाई या करियर के साथ आगे बढ़ने की सही दिशा दिखाते हैं.

कोच - जो किसी खास क्षेत्र, खासकर खेल या प्रदर्शन से जुड़े कौशल को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.

ट्यूटर - जो किसी विषय को व्यक्तिगत या छोटे समूह में समझाने और अभ्यास कराने में मदद करते हैं.

 

नाम अलग, मकसद एक

आज शिक्षक का रूप भले ही बदल गया हो, लेकिन उनकी भूमिका का मूल उद्देश्य अब भी वही है - ज्ञान देना, गलतियों से सीखने की राह दिखाना और विद्यार्थी को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए तैयार करना.

 

किसी के लिए पहला गुरु माता-पिता होते हैं, तो किसी के जीवन में स्कूल का शिक्षक सबसे बड़ा मार्गदर्शक बनता है. कॉलेज का प्राध्यापक करियर की दिशा बदल सकता है और एक अच्छा मेंटर किसी व्यक्ति को उसकी क्षमता पहचानने में मदद कर सकता है.

 

शिक्षक दिवस इसी पूरी परंपरा को सम्मान देने का दिन है. क्योंकि जिंदगी में पद और नाम भले बदल जाएं, लेकिन सिखाने वाले और सीख देने वाले की भूमिका हमेशा खास रहती है.

 

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