Ranchi News : झारखंड की राजनीति में भाजपा के सियासी एजेंडे में इन दिनों एक दिलचस्प बदलाव दिखाई दे रहा है. कुछ समय पहले तक पार्टी के बयानों और विरोध-प्रदर्शनों में स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी प्रमुख मुद्दा नजर आते थे. मंत्री के बयान हों या स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े विवाद, भाजपा को सरकार घेरने के लिए एक आसान राजनीतिक मुद्दा मिल जाता था.
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लेकिन अब भाजपा की सियासी दिशा बदलती दिख रही है. स्वास्थ्य से निकलकर पार्टी का फोकस सीधे शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों के भविष्य पर आ गया है. JPSC-JSSC से जुड़े विवादों को लेकर भाजपा ने राज्यभर में आंदोलन का रास्ता चुना है.
आखिर क्यों बदला भाजपा का एजेंडा?
सवाल यही है कि भाजपा ने स्वास्थ्य से शिक्षा की ओर रुख क्यों किया? क्या डॉ. इरफान अंसारी को लेकर लगातार बयानबाजी अब पार्टी को उतना राजनीतिक फायदा नहीं दे रही? या फिर भाजपा को लगा कि छात्रों और रोजगार का मुद्दा सरकार को घेरने के लिए ज्यादा व्यापक और असरदार हथियार साबित हो सकता है?
राजनीतिक तौर पर देखें तो छात्र और रोजगार का मुद्दा सीधे युवाओं से जुड़ता है. झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों युवा लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा और परिणाम से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं. ऐसे में JPSC-JSSC का मुद्दा भाजपा को सरकार के खिलाफ एक बड़ा नैरेटिव तैयार करने का मौका देता है.
इरफान अंसारी से JPSC-JSSC तक
एक दौर में भाजपा की राजनीति में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी लगातार चर्चा के केंद्र में रहते थे. स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा कोई मामला सामने आता तो भाजपा सरकार के साथ-साथ मंत्री को भी घेरती थी. अब वही राजनीतिक ऊर्जा छात्रों के मुद्दों पर दिखाई दे रही है.
भाजपा ने 8 से 11 सितंबर तक राज्य के सभी 24 जिलों में आंदोलन किया. पार्टी की प्रमुख मांगों में JPSC-JSSC-CGL से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच, छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेना, गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और मामले की CBI जांच शामिल है.
यानी भाजपा की राजनीतिक स्क्रिप्ट में किरदार बदल गया है. पहले स्वास्थ्य मंत्री केंद्र में थे, अब छात्र हैं. पहले सवाल अस्पताल और स्वास्थ्य व्यवस्था के थे, अब सवाल परीक्षा, नौकरी और युवाओं के भविष्य के हैं.
क्या छात्र राजनीति ज्यादा बड़ा मैदान है?
शायद यही इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह हो सकती है. स्वास्थ्य विभाग पर हमला किसी मंत्री या विभाग तक सीमित रह सकता है. लेकिन रोजगार और प्रतियोगी परीक्षा का सवाल सीधे युवाओं के घर तक पहुंचता है.
एक परीक्षा में कथित गड़बड़ी का असर सिर्फ परीक्षा देने वाले छात्र पर नहीं पड़ता, बल्कि उसके परिवार की उम्मीदों और वर्षों की तैयारी पर भी पड़ता है. भाजपा शायद इसी राजनीतिक संवेदनशीलता को समझ रही है.
यही वजह है कि इस बार पार्टी ने किसी एक मंत्री के बयान को मुद्दा बनाने के बजाय छात्रों के आंदोलन को अपने राजनीतिक अभियान का आधार बनाया है.
सियासत बदली या सिर्फ मुद्दा?
हालांकि, बड़ा सवाल अभी भी यही है कि क्या यह भाजपा की स्थायी रणनीति है या फिलहाल बदला हुआ राजनीतिक मुद्दा?
क्योंकि झारखंड की राजनीति में मुद्दे तेजी से बदलते हैं. कल तक स्वास्थ्य व्यवस्था और इरफान अंसारी भाजपा के निशाने पर थे, आज JPSC-JSSC और छात्र आंदोलन केंद्र में हैं. कल अगर राजनीतिक समीकरण बदले तो सियासत का फोकस फिर किसी दूसरे मुद्दे की ओर जा सकता है.
फिलहाल इतना जरूर है कि भाजपा ने स्वास्थ्य की बहस से निकलकर शिक्षा और रोजगार की राजनीति में कदम रखा है. और इस बदलाव को सिर्फ मुद्दे का बदलाव मानना शायद पूरी तस्वीर नहीं होगी. यह युवाओं के बीच राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश भी हो सकती है.
अब देखना यह होगा कि भाजपा छात्रों के मुद्दे को कितनी दूर तक लेकर जाती है. क्या JPSC-JSSC आंदोलन पार्टी के लिए लंबी राजनीतिक लड़ाई बनेगा या फिर कुछ दिनों बाद सियासत की गाड़ी दोबारा किसी मंत्री, किसी बयान और किसी नए विवाद की ओर मुड़ जाएगी?
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