Latehar : एक शिक्षक से मंत्री और अब राज्यसभा सदस्य के रूप में नामित होने तक की बैद्यनाथ राम की दांस्ता कम दिलचस्प नहीं है. कभी आरएसएस और भाजपा के कट्टर समर्थक व कार्यकर्ता रहे बैद्यनाथ राम झामुमो से झारखंड से राज्यसभा के प्रत्याशी के रूप मे नामित किये गये हैं.
1967 में जन्मे बैद्यनाथ राम का बचपन लातेहार जिले के शहीद चौक स्थित धोबी मोहल्ले में बीता. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव से प्राप्त की. इसके बाद मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई बालक उच्च विद्यालय, लातेहार से की और आगे बनवारी साहू महाविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक किया.
शिक्षा पूरी करने के बाद बैद्यनाथ राम शहर में स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शिक्षक बन गए. तीन साल तक उन्होने यहां नौकरी की. उनकी राजनीति में खासी रूची थी. साल 2000 तक बैद्यनाथ राम भाजपा में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनायी और चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार थे. भाजपा ने जब चुनाव में उन्हें अपना प्रत्याशी नहीं बनाया तो उन्होने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव की तैयारी की.
लेकिन बाद इंदर सिंह नामधारी के कहने पर जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े और राजद के प्रकाश राम को हरा कर पहली बार विधानसभा में पहुंचे. उन्होने झारखंड की बाबूलाल मरांडी की सरकार मे खेल मंत्री के अलावा मद्य निषेध और स्वास्य मंत्री का पदभार संभाला.
साल 2005 में भाजपा में शामिल हो गये
2005 के चुनाव से पहले बैद्यनाथ राम एक बार फिर जदयू से भाजपा में शामिल हो गये. चुनाव में जीत कर झारखंड के शिक्षा मंत्री बने. इसके बाद साल 2009 के विधानसभा चुनावों में उन्हें राजद के प्रकाश राम से हार का सामना करना पड़ा. साल 2014 विधानसभा चुनाव में बैद्यनाथ राम ने चुनाव नहीं लड़ा था. इसके बाद साल 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होने झामुमो का दामन थामा और झामुमो से चुनाव लड़ कर चुनाव जीते. हालांकि 2024 के विधानसभा चुनाव में हालांकि उन्हें भाजपा के प्रकाश राम से हार का सामना करना पड़ा.
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