Ranchi News: पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड सरकार की खनन नीति, खनिज राजस्व और सरकारी योजनाओं को लेकर सवाल उठाए हैं. झारखंड भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने केंद्र के खान और खनिज संशोधन बिल 2026 का समर्थन किया और विपक्षी दलों पर बिल को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया.
रघुवर दास ने कहा कि खनिज क्षेत्र से मिलने वाले टैक्स और दूसरे वैधानिक भुगतान का बड़ा हिस्सा राज्यों को मिलता है. उनके अनुसार, केंद्र के नए बिल से राज्यों के राजस्व हित प्रभावित नहीं होंगे.
उन्होंने झारखंड में कोयला और बॉक्साइट खदानों के संचालन का मुद्दा भी उठाया. रघुवर दास के मुताबिक, राज्य में मंजूरी मिलने के बाद भी कई कोल और बॉक्साइट ब्लॉक अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं. उन्होंने कहा कि इससे राज्य को मिलने वाले संभावित राजस्व पर असर पड़ सकता है.
इसे भी पढ़ें -
ओडिशा से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि वहां 2025-26 के लिए खनिज राजस्व का लक्ष्य करीब 7000 करोड़ रुपये रखा गया है, जबकि झारखंड का लक्ष्य 1884.44 करोड़ रुपये है. उन्होंने सरकार से खनिज संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम करने की बात कही.
सेस को लेकर भी रघुवर दास ने अपनी बात रखी. उन्होंने दावा किया कि अक्टूबर 2024 में लगाए गए सेस के बाद कोयले के उत्पादन पर असर पड़ा है. उन्होंने 2024-25 और 2025-26 की पहली तिमाही के उत्पादन के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार की नीति की समीक्षा की जरूरत बताई.
DMF फंड के इस्तेमाल पर सवाल
रघुवर दास ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाले जिला खनिज फाउंडेशन यानी DMF फंड के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने दावा किया कि राज्य में करीब 7915 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध है, जिसका खनन प्रभावित इलाकों में और प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि धनबाद, चाईबासा, चतरा, पाकुड़ और रामगढ़ जैसे जिलों में पानी, स्वास्थ्य, सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
महिलाओं और किसानों की योजनाओं का भी जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के दौरान महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री को लेकर विशेष व्यवस्था की गई थी. उन्होंने किसानों के लिए शुरू की गई आर्थिक सहायता योजना का भी उल्लेख किया.
रघुवर दास ने हेमंत सरकार की महिलाओं से जुड़ी ‘मईंयां’ योजना पर कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने महिलाओं, युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की मांग की.
प्रेसवार्ता में उन्होंने अवैध खनन और खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का मुद्दा भी उठाया. हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

