के बाद संभला बाजार, सेंसेक्स 334 अंक चढ़ा, बजाज फिनसर्व टॉप लूजर)
अच्छी बारिश और अच्छी फसल के संकेत
इस साल चैत्र नवरात्रि 2023 बुधावार से शुरू हो रही हैं. ऐसे में मां दुर्गा की सवारी नौका है. नाव जल में चलने वाला वाहन होता है. ज्योतिष की मानें तो मां दुर्गा जब नाव पर होकर आती हैं तो अच्छी बारिश और अच्छी फसल के संकेत मिलते हैं. माता रानी के नौका से आगमन का मतलब सर्वसिद्धिदायक होता है. नौका वाहन के साथ मां दुर्गा के आगमन या प्रस्थान करने का अर्थ होता है कि, माता रानी से वह सबकुछ प्राप्त होगा, जो आपको चाहिए. यदि मां दुर्गा नौका पर सवार होकार आती हैं तो सर्वसिद्धिदायक होता है. इसे भी पढ़ें : तेलंगाना">https://lagatar.in/ed-called-kavita-of-telangana-cms-daughter-again-today-questioning-lasted-for-10-hours-yesterday/">तेलंगानासीएम की बेटी के कविता को ईडी ने आज फिर बुलाया, कल 10 घंटे चली थी पूछताछ
21 मार्च रात से प्रतिपदा तिथि की होगी शुरुआत
वैदिक पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 21 मार्च रात को 10 बजकर 52 मिनट से होगा और समाप्क अगले दिन 22 मार्च को रात 8 बजकर 21 मिनट पर होगा. नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को अखंड ज्योति और कलश स्थापना के साथ होती है. पवित्र कलश की स्थापना के बाद ही देवी की उपासना की जाती है. घटस्थापना का सबसे अच्छा समय सुबह 6 बजकर 23 मिनट से 7 बजतक 32 मिनट तक रहेगा. प्रतिपदा के दिन 5 राजयोग (नीचभंग, बुधादित्य, गजकेसरी, हंस और शश) बन रहे हैं. नवरात्रि के दौरान 3 सर्वार्थ सिद्धि योग (23 मार्च, 27 मार्च और 30 मार्च को) लगेगा. जबकि अमृत सिद्धि योग 27 मार्च और 30 मार्च को लगेगा. रवि योग 24 मार्च, 26 और 29 मार्च को लगेगा. नवरात्रि के अंतिम दिन रामनवमी के दिन गुरू पुष्य योग भी रहेगा. इसे भी पढ़ें : इक्वीनोक्स">https://lagatar.in/amazing-astronomical-event-of-equinox-tomorrow-the-amazing-view-of-sunrise-will-be-seen-at-zero-degree-from-barwadih-megalith-site/">इक्वीनोक्सकी अद्भुत खगोलीय घटना : कल बरवाडीह मेगालिथ साइट से शून्य डिग्री पर दिखेगा सूर्योदय का अद्भूत नजारा
कलश स्थापना की विधि
कलश स्थापना की विधि शुरू करने से पहले सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करके साफ कपड़े पहनें. उसके बाद एक साफ स्थान पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर माता रानी की प्रतिमा स्थापित करें. इस कपड़े पर थोड़े चावल रखें. एक मिट्टी के पात्र में जौ बो दें. इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें. कलश पर स्वास्तिक बनाकर इसपर कलावा बांधें. कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर अशोक के पत्ते रखें. एक नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांधें. इस नारियल को कलश के ऊपर पर रखते हुए देवी दुर्गा का आवाहन करें. इसके बाद दीप आदि जलाकर कलश की पूजा करें. नवरात्रि में देवी की पूजा के लिए सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश स्थापित किया जाता है. इसे भी पढ़ें : सोनिया">https://lagatar.in/cbi-investigation-will-be-against-harsh-manders-ngo-who-was-close-to-sonia-gandhi/">सोनियागांधी के करीबी रहे हर्ष मंदर के NGO के खिलाफ होगी सीबीआई जांच

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