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जल-जंगल-जमीन से लेकर पेसा एक्ट तक, बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर उठाए सवाल

Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि झारखंड के आदिवासियों को राजनीतिक भीड़ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज किसी की जागीर नहीं है, जिसे जब चाहें और जहां चाहें ले जाकर खड़ा कर दिया जाए.

 

मरांडी ने कहा कि झारखंड के आदिवासी उन विधायकों की तरह नहीं हैं, जिन्हें बसों में भरकर दूसरे राज्यों में भेज दिया जाए. उन्होंने मुख्यमंत्री से अपने पिता की कथित दकियानूसी सोच से बाहर निकलने की नसीहत देते हुए कहा कि आदिवासी समाज अब अपने स्वाभिमान, पहचान और अधिकारों को लेकर सजग हो रहा है.

 

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में आदिवासियों के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया गया है. उन्होंने दावा किया कि आदिवासी समाज के युवा नेता सूर्या हांसदा की पुलिस द्वारा हत्या की गई. इसके अलावा रांची में आदिवासी नेता सुभाष मुंडा और खूंटी में सोमा मुंडा की हत्या का भी जिक्र किया.

 

मरांडी ने रिम्स-2 परियोजना के नाम पर आदिवासियों की जमीन हड़पने की साजिश का आरोप लगाते हुए कहा कि सिरमटोली में सरना स्थल की पवित्रता भंग करने का प्रयास हुआ. उन्होंने संताल परगना से लेकर कोल्हान तक बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने का खेल चलने का भी आरोप लगाया.

 

उन्होंने कहा कि पेसा एक्ट के नाम पर आदिवासियों के साथ विश्वासघात किया गया और कन्वर्जन माफियाओं को खुश करने के लिए स्वशासन और परंपराओं की परिभाषा तक बदल दी गई. मरांडी ने आरोप लगाया कि जल, जंगल और जमीन को खनन माफियाओं के हवाले कर दिया गया.

 

अंत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि खुद को जबरदस्ती आदिवासियों का हितैषी बताने से आदिवासी विरोधी कृत्य छुप नहीं सकते और सच्चाई अब समाज के सामने आ रही है. 

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