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1939 करोड़ का फंड नहीं मिला, झारखंड समेत 7 राज्यों में पंचायतों का काम ठप

  • झारखंड समेत 7 राज्यों को केंद्र ने वित्त आयोग की शर्तें पूरी न करने पर रोका अनुदान
  • झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम व नागालैंड का अनुदान रोका
  • डेढ़ साल से पंचायतों को मिल रहा केवल 15 हजार रुपये प्रति माह संचालन खर्च

 

Ranchi : केंद्र सरकार ने झारखंड समेत 7 राज्यों का 1939 करोड़ रुपये का अनुदान रोक दिया है. जिन राज्यों को मिलने वाले अनुदान को रोका गया है, उनमें झारखंड के अलावा अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड शामिल है.

 

केंद्र सरकार के इस कदम से इन राज्यों में पंचायत स्तर पर विकास कार्य ठप पड़ गया है. इन राज्यों की पंचायतों को पिछले डेढ़ साल से सिर्फ 15 हजार रुपया प्रति माह मिल रहा है. 

 

राज्य के ग्रामीण इलाके के विकास में पंचायतों की अहम भूमिका होती है, इसके बाद भी अनुदान रोक दिया गया. अनुदान रोके जाने की वजह 15वें वित्त आयोग की शर्तों का पालन नहीं किया जाना बताया गया है. 15वें वित्त आयोग मद की राशि पिछले डेढ़ साल से नहीं मिलने के कारण पंचायतों में विकास का काम पूरी तरह ठप हो गया है. 

 

पंचायतों को राशि नहीं मिलने की वजह से ग्रामीण इलाकों में चापाकल मरम्मत, जलमीनार मरम्मत, कूप मरम्मत, नाली मरम्मत, पीसीसी पथ निर्माण, पेवर ब्लॉक पथ निर्माण, चबूतरा निर्माण, पुलिया निर्माण, शौचालय निर्माण जैसी योजनाएं बंद हो गई हैं.

 

पंचायत के प्रतिनिधियों ने बताया कि वह अपने तीन साल के कार्यकाल में पिछले डेढ़ साल से वित्तीय सहायता का इंतजार कर रहे. वित्तीय सहायता कब मिलेगा, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है. इन कारणों से पंचायत प्रतिनिधियों में केंद्र व राज्य की सरकार के प्रति आक्रोश है.

 

जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में झारखंड के पंचायतों को 1307 करोड़ रुपये और 2025-26 के पहली छमाही के लिए 540.40 करोड़ रुपया 15वें वित्त आयोग से मिलना था. लेकिन अभी तक नहीं मिला. इन डेढ़ सालों में मात्र 15 हजार रुपया प्रति माह पंचायत के संचालन के लिए मिल रहे है.

 

इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पंचायतों को किसी भी प्रकार की कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जा रही है. इस कारण पंचायती राज संस्थाएं जन आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल साबित हो रही हैं.

 

इन राज्यों को मिल रहा है अनुदान

देश के 28 राज्यों में आंध्र प्रदेश, बिहार, छतीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उतर प्रदेश और पश्चिम बंगाल.

 

जिन्हें नहीं मिल रहा है अनुदान

झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर, मेधालय, मिजोरम और नागालैंड.

 

झारखंड को कब कितनी मिली राशि

वित्तीय वर्ष  कुल आवंटन मिला
2020-21 1689.00 1689.00
2021-22 1249.00 1249.00
2022-23 1293.00 1293.00
2023-24 1307.00 1307.00
2024-25 1385.00 -
2025-26 1351.00 -
कुल             8274.00             5538.00

 

राज्यों के लिए शर्तें

•⁠  ⁠ऑडिट रिपोर्ट और उपयोगिता प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जमा करना. साथ ही इसे ऑनलाईन और सार्वजनिक डोमेन में रखना.
•⁠  ⁠2023-24 से पहले के वर्ष का ऑडिट स्थानीय निकाय को करना अनिवार्य. 
•⁠  ⁠केवल उन्हीं राज्यों/क्षेत्रों को अनुदान मिलता है जहां ग्रामीण निकाय (पंचायतें) विधिवत गठित और निर्वाचित हैं.
•⁠  ⁠राज्य वित्त आयोग (SFC), अनुदान समय पर प्राप्त करने के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन कर मार्च 2024 तक कार्रवाई रिपोर्ट विधानसभा में रखना था जो झारखंड समेत अन्य राज्यों ने नहीं किया. झारखंड में मार्च 2025 में कार्रवाई रिपोर्ट विधानसभा में रखा गया, जिस वजह से राज्य को पैसा नही मिल रहा है.

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