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चैनपुर में 'मौत का खेल': लाइफ लाइन हॉस्पिटल में अवैध गर्भपात का खुलासा, पुलिस ने जड़ा ताला

  •  झोलाछाप के भरोसे 'लाइफ लाइन' पुलिस को गुमराह कर भागा संचालक, एमटीपी एक्ट की उड़ीं धज्जियां

Gumla (Chainpur): चैनपुर अनुमंडल मुख्यालय के बस स्टैंड के समीप संचालित 'लाइफ लाइन हॉस्पिटल' में चल रहे एक खतरनाक और अवैध धंधे का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. गुरुवार देर रात पुलिस की छापेमारी में बिना डिग्री वाले झोलाछाप द्वारा एक 21 वर्षीय युवती का अवैध गर्भपात (अबॉर्शन) किए जाने का मामला सामने आया है. एसडीपीओ श्रुति अग्रवाल के निर्देश पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया है.

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पुलिस की त्वरित कार्रवाई और रेस्क्यू 

गुरुवार रात करीब 9:00 बजे गुप्त सूचना मिलने पर थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने दल-बल के साथ अस्पताल में छापेमारी की. वहां मौजूद 21 वर्षीय युवती ने मौके पर ही बयान दिया कि संचालक ओमप्रकाश सिंह द्वारा उसका गर्भपात किया गया है. युवती की नाजुक हालत को देखते हुए पुलिस ने उसे तुरंत सरकारी एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर में भर्ती कराया.

 

फरार हुआ संचालक, नहीं दिखाए कागजात 

पुलिस ने अस्पताल संचालक ओमप्रकाश सिंह को शुक्रवार दोपहर 12:00 बजे तक रजिस्ट्रेशन और मेडिकल डिग्री के साथ थाने में उपस्थित होने का अल्टीमेटम दिया था. हालांकि, संचालक तय समय तक पुलिस के सामने नहीं पहुंचा और फरार बताया जा रहा है. थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि अस्पताल को अब मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में विधिवत सील किया जाएगा.

 

बिना विशेषज्ञ के जानलेवा खेल 

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि लाइफ लाइन हॉस्पिटल में न तो कोई एमबीबीएस डॉक्टर है और न ही कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ. संचालक ओमप्रकाश सिंह, जो महज एक आरएमपी है, स्वयं को डॉक्टर बताकर मरीजों की जान जोखिम में डाल रहा था.

 

सरकारी डॉक्टर की भूमिका पर उठे सवाल 

छापेमारी के दौरान सीएचसी के डॉ. प्रभात कुमार की अस्पताल में मौजूदगी और उनकी संदिग्ध भूमिका चर्चा का विषय बनी हुई है. आरोप है कि उन्होंने परिजनों को मीडिया से बात न करने की हिदायत दी. डॉ. प्रभात के अनुसार, युवती को ब्लीडिंग की शिकायत थी, लेकिन उन्होंने अभी तक आधिकारिक तौर पर अबॉर्शन की पुष्टि नहीं की है. उन्होंने कहा कि ब्लीडिंग भारी वजन उठाने से भी हो सकती है.

 

कानूनों का खुला उल्लंघन

यह मामला मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. नियमानुसार, गर्भपात केवल मान्यता प्राप्त केंद्रों पर योग्य डॉक्टरों द्वारा ही किया जा सकता है. 

 

थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने कहा कि अस्पताल में ताला लगा दिया गया है और मजिस्ट्रेट की निगरानी में सीलिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. संचालक कागजात पेश करने में विफल रहा है और अवैध तरीके से चिकित्सा कार्य कर रहा था.

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