Lagatar Desk : नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई तेज बारिश के बाद गंडक नदी में आई भीषण बाढ़ को लेकर बिहार सरकार ने सख्त कदम उठाया है. तटबंधों की सुरक्षा और बाढ़ के दौरान समय पर जरूरी कार्रवाई नहीं करने के मामले में जल संसाधन विभाग ने सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
इन इंजीनियरों को किया गया निलंबित
निलंबित किए गए अभियंताओं में छपरा के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, गोपालगंज के कार्यपालक अभियंता मो. साजिद इकबाल, छपरा के सहायक अभियंता सुनील कुमार और विनोद कुमार शामिल हैं.
इसके अलावा गोपालगंज के सहायक अभियंता मो. जावेद अंसारी, छपरा के कनीय अभियंता चंद्रशेखर कुमार और गोपालगंज के कनीय अभियंता विकास कुमार को भी निलंबित किया गया है. (बिहार की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)
मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता पर भी कार्रवाई
वहीं विभाग ने मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता कुमार मनोज गुप्ता के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है. उन पर चंपारण तटबंध के क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थिति संभालने के लिए जरूरी आकस्मिक कदम उठाने में लापरवाही बरतने का आरोप है.
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कई जगहों पर टूटे तटबंध
दरअसल नेपाल के देवघाट में गंडक नदी का जलस्तर ऐतिहासिक रिकॉर्ड से ऊपर पहुंच गया था. इसका असर बिहार में भी देखने को मिला. बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में गंडक का पानी पुराने उच्चतम स्तर को पार कर गया.
नदी में अचानक बढ़े पानी और तेज दबाव के कारण 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच अलग-अलग जगहों पर तटबंधों को नुकसान पहुंचा. इस दौरान कुल 13 स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए, जिससे आसपास के कई इलाकों में बाढ़ आ गया. इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
घटना के बाद जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया. टीम ने अधिकारियों को जल्द से जल्द तटबंधों की मरम्मत और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक कार्य योजना लागू करने के निर्देश दिए.
विभागीय जांच में कई लापरवाहियां आई सामने
विभाग की जांच में सामने आया कि कुछ स्थानीय अभियंताओं ने बाढ़ से निपटने के लिए बनाई गई योजना को समय पर जमीन पर लागू नहीं किया. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अभियंता तटबंध टूटने वाली जगह पर जरूरी सामग्री और पर्याप्त कर्मचारियों के साथ मौजूद रहने के बजाय वहां से चले गए. इससे कटाव रोकने और स्थिति को संभालने के प्रयास प्रभावित हुए.
जांच में संसाधनों और निर्माण सामग्री के सही प्रबंधन में भी लापरवाही की बात सामने आई है. इसके अलावा स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर तालमेल नहीं होने की बात भी विभागीय रिपोर्ट में कही गई है.

