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तेतरियाखाड़ कोलियरी हमले के बाद एक और वारदात की फिराक में था गिरोह, NIA ने किया खुलसा

Latehar News: एनआईए के अनुसार, इस मामले में सैफ अंसारी उर्फ मोहम्मद सैफ अली उर्फ बबलू की भूमिका जांच के दायरे में रही है. एजेंसी का आरोप है कि उसे एक अन्य हमले के लिए कार्बाइन, पिस्तौल और गोलियां उपलब्ध कराई गई थीं. इस कार्रवाई में अजय तुरी और पंकज करमाली उर्फ खेतिया को भी उसके साथ शामिल होना था.
 
फाइल फोटो

Latehar News: लातेहार के तेतरियाखाड़ कोलियरी में फायरिंग, आगजनी और बम विस्फोट की घटना के बाद भी कथित आपराधिक गिरोह की गतिविधियां जारी थीं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत में दावा किया है कि इस घटना के बाद गिरोह एक और हमले की तैयारी कर रहा था. हालांकि  वारदात को अंजाम देने से पहले ही पुलिस की कार्रवाई में हथियार और गोला-बारूद बरामद कर लिए गए थे. इस वजह से कथित साजिश को अंजाम नहीं दिया जा सका.

 

एनआईए के अनुसार, इस मामले में सैफ अंसारी उर्फ मोहम्मद सैफ अली उर्फ बबलू की भूमिका जांच के दायरे में रही है. एजेंसी का आरोप है कि उसे एक अन्य हमले के लिए कार्बाइन, पिस्तौल और गोलियां उपलब्ध कराई गई थीं. इस कार्रवाई में अजय तुरी और पंकज करमाली उर्फ खेतिया को भी उसके साथ शामिल होना था. रांची स्थित विशेष एनआईए अदालत के 16 सितंबर 2026 के आदेश में जांच एजेंसी की ओर से रखे गए इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.

 

 अमन साहू के निर्देश पर हथियार जुटाने का आरोप

एनआईए ने अदालत को बताया कि अमन साहू, जो अब मृत है, के निर्देश पर शाहरुख अंसारी के माध्यम से हथियारों की व्यवस्था की गई थी. जांच एजेंसी के मुताबिक, सैफ अंसारी को वसीम अंसारी से कानभीटा गांव में एक कार्बाइन, एक पिस्तौल और गोला-बारूद मिले थे. आरोप है कि इन हथियारों का इस्तेमाल अजय तुरी और पंकज करमाली के साथ मिलकर दूसरी वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था.

 

हालांकि इससे पहले बड़कागांव पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हथियार और गोला-बारूद बरामद कर लिए. इस संबंध में बड़कागांव थाना कांड संख्या 44/2021, दिनांक 9 फरवरी 2021 का उल्लेख एनआईए अदालत के आदेश में किया गया है. जांच एजेंसी ने हथियारों की बरामदगी को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है.

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 तेतरियाखाड़ कोलियरी में फायरिंग और आगजनी से दहला था इलाका

इस मामले की प्रमुख घटना 18 दिसंबर 2020 की है. उस दिन लातेहार जिला के बालूमाथ थाना क्षेत्र में स्थित तेतरियाखाड़ कोलियरी के चेकपोस्ट नंबर-1 के पास फायरिंग और आगजनी हुई थी. घटना के दौरान चार ट्रक और एक मोटरसाइकिल जला दिए गए थे. वहीं चार नागरिक घायल हुए थे.

 

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, घटना की सूचना शाम करीब सात बजे मिली थी. मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर भी गोलीबारी किए जाने का आरोप है. घटनास्थल से कारतूस, बम के अवशेष और कोयला कंपनियों व ट्रांसपोर्टरों को धमकी देने वाले हस्तलिखित पर्चे बरामद किए गए थे.

 

एनआईए का आरोप है कि इस हमले का उद्देश्य कोयला कारोबार से जुड़े लोगों में भय पैदा करना और उनसे रंगदारी वसूलने के लिए दबाव बनाना था. जांच एजेंसी ने इस मामले में अमन साहू और सुजीत सिन्हा से जुड़े कथित नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल की है. दोनों की अब मृत्यु हो चुकी है.

 

हमले से एक दिन पहले जुटे थे आरोपी, साजिश रचने का आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक, तेतरियाखाड़ कोलियरी में हुई घटना की तैयारी पहले से की गई थी. एनआईए का आरोप है कि सैफ अंसारी, अजय तुरी और पंकज करमाली 17 दिसंबर 2020 को धोटी गांव पहुंचे थे. यहां कथित तौर पर हथियारबंद समूह के सदस्यों ने हमले की योजना बनाई थी.

 

अदालत के आदेश में दर्ज जांच के तथ्यों के अनुसार, समूह के सदस्य कोलियरी के आसपास मौजूद रहे और अगले दिन वारदात को अंजाम दिया गया. जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद हथियारों को गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाने की योजना थी. हथियारों की आपूर्ति और दूसरी वारदात की तैयारी से जुड़े तथ्यों को भी जांच में शामिल किया गया.

 

जेल में रहते हुए साजिश रचने का भी आरोप

एनआईए की जांच के अनुसार, अमन साहू और सुजीत सिन्हा अलग-अलग जेलों में बंद रहने के दौरान भी कथित तौर पर अपने सहयोगियों के संपर्क में थे. एजेंसी का आरोप है कि कोयला कारोबार से जुड़े लोगों को धमकाकर उनसे अवैध वसूली करने के उद्देश्य से नेटवर्क संचालित किया जा रहा था.

 

जांच में सीसीएल, कोयला ट्रांसपोर्टरों, ठेकेदारों, डीओ होल्डरों और अन्य कारोबारियों को निशाना बनाकर दबाव बनाने की साजिश का आरोप लगाया गया है. एनआईए ने प्रदीप गंझू उर्फ प्रेम उर्फ मंडल समेत कई अन्य आरोपियों की भूमिका का भी उल्लेख किया है.

 

 डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान का हवाला

सैफ अंसारी की कथित भूमिका के समर्थन में एनआईए ने अदालत में संरक्षित गवाहों के बयान, फोटो पहचान प्रक्रिया, मोबाइल फोन से प्राप्त डेटा और ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला दिया. अदालत के आदेश के मुताबिक, संरक्षित गवाहों ए, बी, डी और ई ने फोटो पहचान प्रक्रिया के दौरान सैफ अंसारी और कुछ अन्य आरोपियों की तस्वीरों की पहचान की थी.

 

जांच एजेंसी का दावा है कि मोबाइल फोन से मिले डेटा और ऑडियो रिकॉर्डिंग से सैफ अंसारी, अमन साहू, शाहरुख अंसारी, प्रदीप गंझू और अन्य लोगों के बीच संपर्क तथा कथित आपराधिक साजिश से संबंधित जानकारी मिली है.

 

26 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल

एनआईए ने इस मामले में कुल 26 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र दाखिल किए हैं. आरोपियों पर आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास, आगजनी, रंगदारी, हथियारों और विस्फोटकों से जुड़े अपराधों के अलावा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.

 

इसी मामले में सैफ अंसारी की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी थी. एनआईए ने जमानत का विरोध करते हुए गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य और हथियारों की बरामदगी का हवाला दिया था.

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