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गढ़वा अनाज घोटाला: विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति सख्त, सचिव तलब, मांगी विस्तृत रिपोर्ट

Ranchi/Garhwa: झारखंड विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति ने गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड स्थित सरकारी गोदाम से 2400 क्विंटल अनाज गबन के मामले को गंभीरता से लिया है. खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.
 

Ranchi/Garhwa: झारखंड विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति ने गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड स्थित सरकारी गोदाम से 2400 क्विंटल अनाज गबन के मामले को गंभीरता से लिया है. खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. 
समिति ने इस प्रकरण में विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई की समीक्षा के लिए सचिव, खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग को भी 28 जनवरी की बैठक में विस्तृत प्रतिवेदन के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है. समिति का कहना है कि मामला सीधे तौर पर गरीबों के हक के राशन से जुड़ा है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी.


विभाग की स्थिति


विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में गढ़वा उपायुक्त से विस्तृत जांच प्रतिवेदन मांगा गया था. इसके लिए विभाग की ओर से कई रिमाइंडर भी भेजे गए, लेकिन अब तक जिला स्तर से रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो सकी है. 


इसी बीच इस मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है. ऐसे में विधानसभा समिति द्वारा संज्ञान लेना और वरीय अधिकारी को तलब करना मामले की गंभीरता को दर्शाता है.


क्या है पूरा मामला


झारखंड के गढ़वा जिले में सरकारी अनाज वितरण प्रणाली से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है. केतार प्रखंड स्थित राज्य खाद्य निगम (SFC) के गोदाम से लगभग 9,000 क्विंटल चावल और गेहूं गायब पाए गए हैं.


-घोटाले की मात्रा: प्रारंभिक जांच में करीब 9,003 क्विंटल अनाज की कमी


-अनुमानित कीमत: बाजार दर के अनुसार लगभग 3 करोड़ रुपये


-प्रशासनिक कार्रवाई: उपायुक्त के निर्देश पर जिला आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा जांच कर रिपोर्ट सौंपी गई


-कानूनी कार्रवाई: दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज, कंप्यूटर ऑपरेटर और गोदाम मैनेजर को जेल भेजा गया

 

मिलीभगत की आशंका


जानकारी के अनुसार, जिन लोगों को जेल भेजा गया है, केवल उनके स्तर पर इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं माना जा रहा है. आशंका है कि यह अनाज घोटाला लंबे समय से अधिकारियों और गोदाम प्रबंधन की मिलीभगत से चल रहा था, जिसमें गरीबों के हिस्से का राशन बाजार में कालाबाजारी के लिए भेज दिया गया. अब सभी की निगाहें 28 जनवरी को होने वाली विधानसभा समिति की बैठक पर टिकी हैं, जहां विभाग को हर स्तर पर जवाब देना होगा.

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