Garhwa : जिले में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले रैकेट का खुलासा हुआ है. जिला प्रशासन ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मेराल प्रखंड के ओखरगाड़ा पचपेड़ी मोड़ स्थित विशाल ऑनलाइन सेंटर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है.
जानकारी के अनुसार, एसडीएम संजय कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि उक्त सेंटर में मेदिनीनगर सदर अस्पताल के नाम पर जाली जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं. इसके बदले लोगों से मोटी रकम भी वसूली जा रही है.
सूचना मिलने के बाद प्रभारी बीडीओ-सह-सीओ यशवंत नायक और मेराल थाना प्रभारी विष्णु कांत के नेतृत्व में जांच टीम बनाकर ऑनलाइन सेंटर में छापेमारी की और मौके से पहचान पत्रों की फोटोकॉपी, जाली सर्टिफिकेट और आवेदन फॉर्म बरामद किए.
सीओ यशवंत नायक के अनुसार, सेंटर संचालक विशाल कुमार (गोंदा गांव निवासी) संतोष कुमार (मेदिनीनगर निवासी) के साथ मिलकर यह रैकेट चला रहा था. पूछताछ में संचालक ने स्वीकार किया कि ग्राहकों के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की फोटोकॉपी व्हाट्सएप के जरिए मेदिनीनगर भेजी जाती थी.
वहां से मेदिनीनगर सदर अस्पताल के नाम का जाली डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर वापस भेज दिया जाता था.
प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि एक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के लिए लोगों से 1000 से 1400 रुपये तक वसूले जाते थे. संचालक ने अब तक 30 से 40 जाली प्रमाण पत्र जारी करने की बात भी कबूल की है.
प्रशासन ने मामले को गंभीर संगठित अपराध मानते हुए सेंटर संचालक विशाल कुमार, मेदिनीनगर निवासी संतोष कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ मेराल थाना में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है. साथ ही इस रैकेट के जरिए जारी सभी जाली जन्म प्रमाण पत्रों को चिन्हित कर रद्द किया जाएगा.
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी प्रमाण पत्र के लिए केवल अधिकृत प्रज्ञा केंद्र या सरकारी पोर्टल का ही उपयोग करें. फर्जी दस्तावेज बनवाने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
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