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गढ़वा : शहीदों की विरासत को मिटाने की साजिश बर्दाश्त नहीं- मोर्चा

  • सरकार स्पष्ट करे — डैम बना रही है या बाघ परियोजना का विस्तार : अशोक पाल

Garhwa : बिश्रामपुर में शनिवार को आयोजित संयुक्त बैठक में विस्थापन विरोधी संघर्ष मोर्चा और विभिन्न जनसंगठनों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शहीद नीलांबर – पीतांबर की ऐतिहासिक भूमि और विरासत को मिटाने की साजिश चल रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

 

क्रांतिकारी किसान मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पाल ने कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि वह उत्तर कोयल जलाशय परियोजना का निर्माण कर रही है या पलामू बाघ परियोजना क्षेत्र का विस्तार.

 

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार विधिक प्रक्रिया पूरी किए बिना किसी परिवार को विस्थापित नहीं किया जा सकता, जबकि मण्डल डैम क्षेत्र के 7 गांवों के 780 परिवारों को बिना कानूनी प्रक्रिया के बेदखल किया जा रहा है.

 

अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के सदस्य त्योफिल लकड़ा ने कहा कि ग्रामीण अपने पूर्वजों की धरोहर भूमि से बेदखल नहीं होंगे. उन्होंने बताया कि 29 नवंबर 2023 के वन मंत्रालय के दिशा-निर्देश के अनुसार ग्राम सभा की अनुमति और वनाधिकार कानून का पालन अनिवार्य है, लेकिन बिश्रामपुर और बलिगढ़ ग्राम सभाओं से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया.

 

कुटकु डूब क्षेत्र शहीद नीलांबर– पीतांबर संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष मिखाएल केरकेट्टा ने कहा कि शहीदों की जन्मस्थली चेमो सन्या को किसी भी कीमत पर डूबने नहीं दिया जाएगा. आगामी 11 जनवरी को शहीद नीलांबर– पीतांबर की आदमकद मूर्ति का अनावरण किया जाएगा, जिसमें देशभर से किसान संगठन शामिल होंगे.

 

वामसेफ जिलाध्यक्ष सह अधिवक्ता विनय पाल ने कहा कि विस्थापन के खिलाफ लड़ाई अब और तेज होगी. हम इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन और न्यायालय तक ले जाएंगे.

 

उन्होंने कहा कि प्रभावित ग्रामीण पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर और केएन त्रिपाठी के आवास का घेराव करेंगे तथा वन विभाग के विरुद्ध शिकायतें आदिवासी मंत्रालय और आयोगों में दर्ज कराएंगे.

 

बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा, वन अधिकार समिति, अखिल भारतीय आदिवासी महासभा और डूब क्षेत्र संघर्ष मोर्चा के कई नेता व प्रतिनिधि मौजूद थे.

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