Lagatar Desk
अब तक ईरान ने होर्मुज की खाड़ी में बाधा डाल रखी थी. ईरान-अमेरिका समझौता टूटने के बाद अमेरिका ने भी वहां से जहाजों को नहीं गुजरने देने की बात की है. ऐसे में यह दोहरा ब्लॉकेज भारत के लिए बड़ा संकट ला सकता है.
भारत के 33 करोड़ घरों में गैस की किल्लत हो सकती है. क्योंकि अब तक ना तो कोई समझौता सामने है, ना ही कोई कूटनीतिक पहल. और जब 33 करोड़ घरों में गैस संकट शुरु होगा, तब भारत को यह तय करना पड़ेगा कि वह किसके साथ है.
ईरान के साथ या अमेरिका के? यह अलग बात है कि ईरान ने कहा है कि भारत के जहाज पर होर्मुज की खाड़ी में कोई रोक नहीं है. लेकिन अमेरिका ने साफ कहा है कि अब वह होर्मुज के रास्ते कोई भी जहाज जाने नहीं देगा.
भारत का संकट इसलिए भी बड़ा है क्योंकि अमेरिका ने रूस को समुद्र में मौजूद कच्चे तेल को बेचने के लिए 31 दिन की छूट दी थी. ईरान को भी 31 दिन की छूट मिली थी. इसी छूट को देखते हुए भारत की रिलायंस पेट्रोलियम ने समुद्र में मोजूद 50 लाख बैरल तेल खरीदा था.
19 अप्रैल को यह समय सीमा खत्म हो रही है. यानी सिर्फ सात दिन बचे हैं. रिलायंस अब तक सिर्फ 20 लाख बैरल तेल ही होर्मुज से पार करा पाया है.
भारत के लिए होर्मुज कितना महत्वपूर्ण है, इसे समझने के लिए इस आंकड़े को समझें. भारत की कुल खपत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 90 प्रतिशत गैस और एलपीजी आयात की जाती है.
वर्ष 2025 में 41 प्रतिशत तेल व गैस होर्मुज के रास्ते आया था. जबकि इस साल अब तक 65 प्रतिशत तेल व गैस होर्मुज के जरिये आया है. अब ईरान-अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में वार्ता टूटने के बाद अमेरिका ने होर्मुज से किसी भी जहाज को गुजरने से रोकने की चेतावनी दी है. ऐसे में भारत में तेल व गेस की किल्लत होना लाजिमी है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment