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इस्लामाबाद टॉक विफल, अमेरिका का होर्मुज पर नियंत्रण का दावा, 15 भारतीय जहाज फंसे...

अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई बातचीत का नतीजा सिफर होने का प्रभाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पडा है. इस इलाके में तनाव बढ़ गया है. साथ ही फिर से युद्ध भड़कने की आशंकाएं बढ़ गयी हैं. इस्लामाबाद टॉक विफल होते ही अमेरिका ने होर्मुज पर नियंत्रण करने का दावा कर दिया है.
 

New Delhi :  अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई बातचीत का नतीजा सिफर होने का प्रभाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पडा है. इस इलाके में तनाव बढ़ गया है. साथ ही फिर से युद्ध भड़कने की आशंकाएं बढ़ गयी हैं. इस्लामाबाद टॉक विफल होते ही अमेरिका ने होर्मुज पर नियंत्रण करने का दावा कर दिया है.

 

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा  है कि नाकाबंदी वाले क्षेत्र में मौजूद जहाजों को रोका और जब्त किया जा सकता है. सेंटकॉम ने कहा है कि अमेरिकी सेना होर्मुज के पूर्व में ओमान की खाड़ी और अरब सागर में सभी प्रकार के जहाजों (चाहे वे किसी भी फ्लैग के हों) की नाकाबंदी लागू करेगी.

 

अमेरिकी घोषणा से भारतीय जहाजों की परेशानी बढ़ गयी है. खबर है कि फारस की खाड़ी में अभी भी 15 भारतीय झंडे वाले जहाज फंसे हुए हैं. इनमें एक एलएनजी जहाज, एक खाली एलपीजी जहाज, छह क्रूड ऑयल टैंकर (पांच भरे हुए और एक खाली), तीन कंटेनर जहाज, एक ड्रेजर और एक केमिकल कार्गो जहाज शामिल हैं.

 

सूत्रों के अनुसार इन जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय नौसेना लगातार प्रयासरत है. खबर है कि इससे पहले 11 अप्रैल को भारतीय झंडे लगा 10वां 20400 टन लदा एलपीजी टैंकर जग विक्रम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  पार कर अरब सागर में पहुंच गया. इस पर 24 क्रू सदस्य हैं यह जहाज 15 अप्रैल को मुंबई पहुंच जायेगा.

 

 इससे पहले जहाज ग्रीन संवी  46,655 टन एलपीजी लेकर गुजरात पहुंच चुका है. ग्रीन आशा 15,400 टन एलपीजी लेकर मुंबई पहुंचा.  इसके अलावा जग वसंत कांडला पहुंचा है.  पाइन गैस ने 45,000 टन एलपीजी लेकर न्यू मंगलौर पहुंचा है. यानी अब तक कुल 10 भारतीय जहाज होर्मुज पार कर चुके हैं. शुरुआत में 25 जहाज फंसे हुए थे. अब 15 बचे हैं.  

 


बता दें कि भारतीय नौसेना ने युद्ध शुरू होते ही अतिरिक्त टास्क फोर्स का गठन किया था. अहम खबर यह है कि नौसेना फारस की खाड़ी के अंदर नहीं जा रही है, लेकिन होर्मुज पार करने वाले भारतीय जहाजों को नेविगेशन और कम्युनिकेशन की मदद दे रही है. होर्मुज पार करने के बाद नौसेना जहाजों को  गल्फ ऑफ ओमान और फिर उत्तर अरब सागर में  एस्कॉर्ट करती हैं.  

 

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