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US-ईरान वार्ता विफल का वैश्विक बाजार में असर, WTI क्रूड 104.9 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई, जिसका असर अब वैश्विक बाजारों पर साफ नजर आ रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है.
 

Lagatar Desk : अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई, जिसका असर अब वैश्विक बाजारों पर साफ नजर आ रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है.

 

WTI क्रूड की कीमत 8.4 फीसदी की तेजी के साथ 104.9 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गयी है. वहीं, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 7 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया.

 

तेल के साथ-साथ यूरोपीय गैस बाजार भी अछूता नहीं रहा. गैस वायदा कीमतों में एक समय लगभग 18 फीसदी तक की उछाल दर्ज की गई, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है.

 

होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो फारस की खाड़ी को दुनिया के अन्य बाजारों से जोड़ने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है.

 

यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेना ने इस इलाके में सीमित नाकाबंदी लागू की है. हालांकि अमेरिका का कहना है कि ईरान को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को सामान्य रूप से गुजरने दिया जाएगा, लेकिन हालिया हमलों के बाद यह मार्ग पहले से ही प्रभावित रहा है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है.

 

परमाणु मुद्दे पर टकराव

कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि समझौता अंतिम चरण में था. लेकिन अमेरिका ने ऐन वक्त पर नई शर्तें रख दीं. वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की प्राथमिकता ईरान से यह लिखित आश्वासन लेना था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, जो इस वार्ता में संभव नहीं हो सका. 

 

हालांकि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि जलडमरूमध्य पर उनका नियंत्रण है और किसी भी सैन्य गतिविधि का जवाब दिया जाएगा. अब 22 अप्रैल को समाप्त होने वाली युद्धविराम समयसीमा पर सबकी नजरें टिकी हैं. इसके बाद हालात किस दिशा में जाएंगे, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार के लिए बेहद अहम होगा.

 

 

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