Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

गौरव गोगोई ने कहा, दुखी मन से स्पीकर के खिलाफ लाये हैं अविश्वास प्रस्ताव, पीठासीन पर उठे सवाल

गौरव गोगोई ने कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेंडिंग हैं. ऐसे में स्पीकर के पास पीठासीन तय करने का अधिकार नहीं है. पूछा कि यह कैसे तय किया गया कि जगदंबिका पाल चेयर पर रहेंगे. गौरव गोगोई  की बात काटते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि चुनाव की स्थिति में भी स्पीकर का कार्यालय एक्टिव होता है.
Advertisement
Advertisement

New Delhi : संसद सत्र के दूसरे चरण के दूसरे दिन आज मंगलवार को लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया. किशनगंज(बिहार) से कांग्रेस के सांसद डॉक्टर मोहम्मद जावेद ने स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया.

 

उन्होंने ओम बिरला के आचरण पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता को नहीं बोलने दिया गया. आरोपों की फेहरिस्त गिनाते हुए कहा, महिला सदस्यों के खिलाफ आरोप लगाये गये. ओम बिरला ने सभी विवादास्पद मुद्दों पर सत्ताधारी दल का पक्ष लिया. खबर है कि इस प्रस्ताव पर संसद में 10 घंटे चर्चा होगी.

 

 

 

कांग्रेस की ओर से विपक्ष के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने चर्चा की शुरुआत  करते हुए  सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का जिक्र किया. कहा कि स्पीकर की चेयर पर जो बैठते हैं, उनसे यह उम्मीद कि जाती है कि  वे भेदभाव नहीं करेंगे. इस क्रम में कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है. प्रस्ताव लाते हुए हमें कोई खुशी या उमंग नहीं है.

 

यह भी कहा कि ओम बिरला के संबंध व्यक्तिगत रूप से हर सदस्य के साथ अच्छे हैं, लेकिन हम संविधान बचाने, सदन की मर्यादा बचाने के लिए यह प्रस्ताव लाने के लिए विवश हैं. बहुत दुखी मन से हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ा है. साथ ही गौरव गोगोई ने पीठासीन पर सवाल उठाया.

 

गौरव गोगोई ने कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेंडिंग हैं. ऐसे में स्पीकर के पास पीठासीन तय करने का अधिकार नहीं है. यह कैसे तय किया गया कि जगदंबिका पाल चेयर पर रहेंगे.  गौरव गोगोई  की बात काटते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि चुनाव की स्थिति में भी स्पीकर का कार्यालय एक्टिव होता है.  

 

इस पर गौरव गोगोई ने कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में पावर डिप्टी स्पीकर के पास होती है. लेकिन यह सदन बगैर डिप्टी स्पीकर के चल रहा है.  

 

अहम बात यह है कि बहस शुरू होने से पहले  लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश होते ही पीठासीन की शक्तियों को लेकर बहस छिड़ गयी.  सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का उल्लेख करते हुए पीठासीन की शक्तियों पर सवाल उठाये.

 

ओवैसी ने कहा कि ओम बिरला ने जगदंबिका पाल की नियुक्ति की है, ऐसे में पाल पीठासीन सभापति की भूमिका  नहीं निभा सकते. ओवैसी को कांग्रेस के सांसद केसी वेणुगोपाल का समर्थन मिला. टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भी यही राय व्यक्त की.

 

इस पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जो भी आसन पर बैठेगा, उसे अध्यक्ष की तरह अधिकार होगा. भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने निशिकांत दुबे का समर्थन करते हुए कहा कि सदन के नियम के तहत जिस सांसद को पीठासीन सभापति नियुक्त किया गया है उसे सदन संचालन का पूरा अधिकार है.  

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही