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भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण : 19 राज्यों के 181 जिलों की 7,500 जगहों पर भूस्खलन का खतरा

सूत्रों के अनुसार रक्षा भू-सूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान इन क्षेत्रों में जोखिम का अनुमान लगा रहा है. महत्वपूर्ण बात यह है कि समय पूर्व चेतावनी देने के लिए तंत्र डेवलप किया गया है. आपदा प्रबंधन पर गृह मंत्रालय की संसदीय समिति की 261वीं रिपोर्ट में भूस्खलन से महत्वपूर्ण अवसंरचना और परिवहन गलियारों को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही गयी है.
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New Delhi : भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार  देश के पहाड़ी और संवेदनशील  क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा लगातार गंभीर होता जा रहा  है. 19 राज्यों के 181 जिलों की लगभग 7,500 भूस्खलन वाली जगहों को चिह्नित किया गया है. सर्वेक्षण में कहा गया है कि  हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट सर्वाधिक खतरेवाले क्षेत्र हैं.

 

कहा गया है कि खतरा आम आबादी तक सीमित नहीं रह कर सड़कों, परिवहन गलियारों, सामरिक संरचनाओं सहित रक्षा प्रतिष्ठानों तक पहुंच गया है. जानकारी के अनुसार भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण में 4.3 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र भूस्खलन संभावित क्षेत्र में दर्शाया गया है.

 

 

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में लगातार जमीन खिसकने की घटनाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है.चेताया गया है कि इसका असर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों सहित वहां की सड़कों. अन्य जरूरी सुविधाओं पर पड़ सकता है.

 

सूत्रों के अनुसार रक्षा भू-सूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान इन क्षेत्रों में जोखिम का अनुमान लगा रहा है. महत्वपूर्ण बात यह है कि समय पूर्व चेतावनी देने के लिए तंत्र डेवलप किया गया है. आपदा प्रबंधन पर गृह मंत्रालय की संसदीय समिति की 261वीं रिपोर्ट में भूस्खलन से महत्वपूर्ण अवसंरचना और परिवहन गलियारों को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही गयी है.  

  

बता दें कि संसदीय समिति ने संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में अनियंत्रित निर्माण रोकने की सिफारिश की है. अति संवेदनशील ढलानों और पर्यटन स्थलों पर निर्माण कार्य सीमित करने और वनों की कटाई पर रोक लगाने पर बल दिया है.समिति ने गहरी जड़ों वाले पौधे लगाने की भी बात कही है.  

  
 

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