Giridih News: कबरीबाद कोयला क्षेत्र के दीर्घकालिक सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय विकास को लेकर शुक्रवार को नगर भवन में हितधारकों की बैठक हुई. बैठक में उपायुक्त रामनिवास यादव, खनन बंदी सलाहकार समिति के सदस्य, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के अधिकारी, प्रभावित पंचायतों के जनप्रतिनिधि सहित 43 प्रतिभागी शामिल हुए. यह बैठक जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर (जेटीआरसी), आईआईटी कानपुर के सहयोग से की गई.
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बैठक में क्षेत्र के उपलब्ध संसाधन, खनन गतिविधियों के बाद की संभावनाएं और समुदाय की जरूरतों पर सुझाव दिए गए. उपायुक्त ने कहा कि कबरीबाद क्षेत्र के भविष्य की योजना में स्थानीय निवासियों की आवश्यकताओं, आजीविका के अवसरों तथा दीर्घकालिक प्रभावों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि आईआईटी कानपुर क्षेत्र के आर्थिक विकास की रूपरेखा तैयार करने में सहयोग कर सकता है.
आईआईटी कानपुर के प्रो. प्रदीप स्वर्णकार ने जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर कहा कि खनन के साथ ही क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय भविष्य की योजना भी आवश्यक है. सीसीएल के महाप्रबंधक कनैया शंकर गोपाल और आनंद प्रकाश ने भी खदान की स्थिति एवं भावी संभावनाओं पर विचार रखे.
बैठक में महिलाओं एवं युवाओं के लिए मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, डेयरी, मुर्गी पालन, जैविक खेती और वर्मी कम्पोस्ट जैसे वैकल्पिक आजीविका विकल्पों पर सुझाव सामने आए. पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा कौशल विकास पर भी चर्चा हुई.
प्रशासन के अनुसार प्राप्त सुझावों को कबरीबाद के लिए साक्ष्य-आधारित पुनर्पयोग योजना तैयार करने के इनपुट के रूप में लिया जाएगा. ये सुझाव खान बंदी सलाहकार समिति के समक्ष भी रखे जाएंगे.
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