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गिरिडीहः लोगों ने जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का लिया संकल्प, कार्यशाला आयोजित

Giridih : गिरिडीह नगर भवन में सोमवार को समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के उन्मूलन, बाल विवाह की रोकथाम व महिला अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया. डीसी रामनिवास यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जन-जागरूकता बढ़ाना, बाल विवाह निरोधक कानून की जानकारी देना तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था.

 

डीसी ने अपने संबोधन में कहा कि परंपरा तब तक सम्मान योग्य है, जब तक वह मानव गरिमा की रक्षा करे. बाल विवाह को रोकने के लिए बने कानून का सख्ती से पालन किया जा रहा है. यदि किसी लड़की की आयु 18 वर्ष और लड़के की आयु 21 वर्ष से कम होती है, तो उसे बाल विवाह माना जाता है. उन्होंने कहा कि गिरिडीह जिले को बाल विवाह मुक्त जिला घोषित करने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और सभी सरकारी तंत्र एकजुट होकर कार्य करेंगे. इस मौके पर अधिकारियों व आम लोगों ने जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प लिया.

 

डीडीसी ने जानकारी दी कि जिले में बाल विवाह की दर 45.6 प्रतिशत है, जबकि राज्य में यह 32.2 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि बाल विवाह न केवल एक सामाजिक कुरीति है बल्कि एक जघन्य अपराध भी है. एसडीओ ने भी अपने विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम में डायन प्रथा, सावित्रीबाई फुले समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, सामूहिक अंतिम संस्कार योजना, मानव तस्करी, मिशन शक्ति एवं अन्य योजनाओं पर आधारित फिल्म भी प्रदर्शित की गई. कार्यशाला में एसपी, अपर समाहर्ता, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, डीईओ, सदर एसडीपीओ, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी समेत बड़ी संख्या में महिला व पुरुष उपस्थित थे.


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