- हाईकोर्ट इसे न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग मानता
- इलाहाबाद हाईकोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट ने लगाया है जुर्माना
Ranchi : जनहित याचिकाओं (PIL) में गलत या झूठी जानकारी देने पर हाईकोर्ट का रवैया काफी सख्त है. देशभर के हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं में निजी स्वार्थ के लिए वादी या प्रतिवादी अक्सर गलत या झूठी जानकारी दे रहे हैं, जिसे हाईकोर्ट न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग मानता है.
एक ताजा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झूठी जानकारी देकर जनहित याचिका दायर करने वाले वकील पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है. अदालत ने सड़क अतिक्रमण के विरुद्ध दायर पीआईएल पर सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने शपथ पत्र में गलत जानकारी दी और अपने विरुद्ध लगाए गए आपराधिक मामले को छिपाया.
इस पर चीफ जस्टिस अरुण भंसाली की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है. ऐसे मामलों में लगाम लगाना आवश्यक है, ताकि निजी स्वार्थ के लिए जनहित याचिका का सहारा लेने वाले को हतोत्साहित किया जा सके.
याचिकाकर्ता पेशे से एडवोकेट है. उसने आरोप लगाया था कि मेरठ स्थित दौशाला शुगर मिल ने सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण कर रखा है, जिससे ग्रामीणों को भारी सुविधा हो रही है. कई बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.
वहीं शुगर मिल की ओर से बताया गया था कि याचिकाकर्ता गन्ना विकास परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुका है और वह विभिन्न गतिविधियों में लिप्त है. उस पर आपराधिक मामले भी लंबित हैं. उसने मिल प्रबंधन से निजी रंजिश के लिए ऐसा किया है.
वहीं झारखंड हाईकोर्ट में भी नेतरहाट आवासीय विद्यालय के प्रबंधन सुधार से जुड़ी जनहित याचिका (W.P.(PIL) No. 4052 of 2025) की सुनवाई चल रही है. मामले में बीते दिनों सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्कूल में गठित अस्थायी (एड–हॉक) समिति की बैठकों में बाधा डालने के प्रयासों को गंभीरता से लिया. अदालत ने स्कूल प्रशासनिक अधिकारी की आवेदन याचिका को खारिज कर दिया. साथ ही उस पर 25 हजार रुपये की जुर्माना भी लगाया.
इस जनहित याचिका के खिलाफ विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी रोशन कुमार बक्सी ने व्यक्तिगत क्षमता में दायर आवेदन (I.A. No. 4434 of 2026) के माध्यम से याचिकाकर्ता के खिलाफ “पैसा–प्रेरित या व्यक्तिगत द्वेष” का आरोप लगाकर याचिका की मान्यता चुनौती दी थी. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस आवेदन को अदालती प्रक्रिया के दुरुपयोग के रूप में खारिज कर दिया और जुर्माना राशि को ब्रज किशोर नेत्रहीन बालिका विद्यालय, रांची के लिए निर्धारित किया.
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