New Delhi \Ranchi : केंद्र सरकार ने देश में स्कूली शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ओपन स्कूलिंग व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है.शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) ने 2030 तक प्री-स्कूल से लेकर माध्यमिक स्तर तक 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) हासिल करने का लक्ष्य तय किया है.
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार देशभर में स्कूल से बाहर और ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करेगी.आंकड़ों के अनुसार, 14-18 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं. वहीं कक्षा 3 से 8 तक के लगभग 11% बच्चे स्कूल से बाहर हैं और हर साल 50 लाख से अधिक छात्र बोर्ड परीक्षाओं में असफल हो जाते हैं.
सरकार का मानना है कि ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में ओपन स्कूलिंग एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है. इसी कड़ी में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) की भूमिका को और मजबूत किया जाएगा, जो दुनिया का सबसे बड़ा ओपन स्कूलिंग बोर्ड है.
NIOS के माध्यम से छात्रों को लचीला प्रवेश, ऑन-डिमांड परीक्षा प्रणाली, कौशल आधारित पाठ्यक्रम और कई अवसरों में परीक्षा पास करने की सुविधा मिलेगी. इसके साथ ही दिव्यांग, गरीब, आदिवासी, प्रवासी और अन्य वंचित वर्गों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
सरकार ने NIOS मित्र कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना बनाई है, जिसके तहत प्रशिक्षित कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान करेंगे, उनका मार्गदर्शन करेंगे और नामांकन में मदद करेंगे.
इसके अलावा देश के हर ब्लॉक में कम से कम एक NIOS अध्ययन और परीक्षा केंद्र स्थापित करने की योजना है. इसके लिए पीएम श्री स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को भी NIOS केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा.सरकार का कहना है कि इन प्रयासों से शिक्षा में समानता, पहुंच और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी तथा ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.
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