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भगवान मुझे फिर झारखंड में ही पैदा करना, यहां घर बैठे ही मिलती है पूरी सैलरी

Ranchi: मैं खुशकिस्मत हूं कि झारखंड में अफसर हूं. मैं घूमा. रिश्तेदारों से मिला. पोस्टिंग नहीं मिली. लेकिन सैलरी पूरी मिल रही है. हे भगवान मुझे फिर झारखंड में ही पैदा करना. यह राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों द्वारा एक ग्रुप में लिखी गयी टिप्पणियां हैं, जो पिछले दिनों हुए तबादले के बाद से लिखी जा रही है. इन टिप्पणियों में लंबे समय से पोस्टिंग के इंतजार में बैठे रहने, बिना काम वेतन लेने और सीनियर अफसरों को जूनियर पद पर काम से संबंधित है.
 

Ranchi: मैं खुशकिस्मत हूं कि झारखंड में अफसर हूं. मैं घूमा. रिश्तेदारों से मिला. पोस्टिंग नहीं मिली. लेकिन सैलरी पूरी मिल रही है. हे भगवान मुझे फिर झारखंड में ही पैदा करना. यह राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों द्वारा एक ग्रुप में लिखी गयी टिप्पणियां हैं, जो पिछले दिनों हुए तबादले के बाद से लिखी जा रही है. इन टिप्पणियों में लंबे समय से पोस्टिंग के इंतजार में बैठे रहने, बिना काम वेतन लेने और सीनियर अफसरों को जूनियर पद पर काम से संबंधित है.

 

 एक साल से पोस्टिंग के इंतजार में बैठे अफसर की टिप्पणी


हम सचमुच बहुत किस्मत वाले हैं. खासकर 'लिमिटेड बैच' के जूनियर सेलेक्शल ग्रेड (SDO रैंक) के अधिकारी. पिछले एक साल से अपनी पोस्टिंग का इंतज़ार कर रहे हैं. बिना कोई काम किए भी सैलरी ले रहे हैं. दूसरी तरफ, ऐसे लोग भी हैं जो दो वक्त की रोटी कमाने के लिए सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करते हैं. लोग अपना घर-बार छोड़कर कमाने के लिए दूर चले जाते हैं, ताकि वे अपना और अपने परिवार का गुजारा कर सकें. मेरे जैसे इन खुशकिस्मत दोस्तों (लिमिटेड बैच वालों) को जरा देखिए. बगैर मेहनत किए पूरी सैलरी मिल रही है.

 

वहीं कुछ ऐसे अधिकारी भी हैं, जिन्हें दो या तीन-तीन पदों का काम करना है. लेकिन सैलरी एक ही पद की मिलती है. सचमुच यह नौकरी सपनों वाली है. घर बैठे-बैठे IPL देखो और पूरी सैलरी लो. मुझे दुनिया का कोई एक ऐसा देश बताएं, जहां इतनी मेहरबानी की जाती है. वह भी ऐसे समय में जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी का सामना कर रही है. सचमुच हम बहुत ही किस्मत वाले हैं.

बिना काम सैलरी पाने पर टिप्पणी

मुझे भी यह सौभाग्य मिला. मैंने 7 महीने इंतजार किया. मैं हर जगह घूमा. मैंने संस्कृत सीखी. अपने सभी रिश्तेदारों से मिला. सैकड़ों किताबें पढ़ीं और मुझे पूरी सैलरी भी मिली. हे ईश्वर, मुझे फिर से झारखंड में जन्म देना.

 

अफसरों की अपनी स्थिति से जुड़ी टिप्पणी


जिस सेवा में किसी पदाधिकारी को किसी के आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र इत्यादि या जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, म्यूटेशन के लिए... जमीन की मापी या निहायत ही छोटे काम तक कराने के लिए पैरवी करना पड़ता हो और फिर भी लोग नहीं सुनते हैं.... उससे दुखद, निराशाजनक बात क्या होगी.... इस सेवा के लिए....एथिक्स और एथिकल बातें वो केवल सुनने में अच्छी लगती हैं जो प्रैक्टिकली हमारी सेवा में है नहीं.....

 
एक दूसरे के प्लेस ऑफ पोस्टिंग और पद के हिसाब से हम जज करते हैं... हम भूल गए हैं कि हम झारखंड प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी हैं....
लेकिन इससे अलग हमारी जो दूसरी पहचान (जो कहीं जाति है, कहीं धर्म है, कहीं क्षेत्रवाद है,  भाषा है तो कहीं कैडर है या तो कहीं बैच है) हमारे ऊपर ज्यादा हावी है. यही सारी समस्याओं की जड़ है. इसलिए बी प्रैक्टिकल इथिकल होने से कुछ मिलने वाला नहीं है.


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