Search

 
 
 

HC को सरकार ने बताया - अनुसंधान की प्रीयोडिकल रिपोर्ट DALSA  गुमला को देर से भेजी गई है

Ranchi News: कोर्ट ने कहा कि प्रीयोडिकल रिपोर्ट देरी से भेजने के मामले पर वन मैन कमेटी ने क्यों विचार नहीं किया और वर्ष 2018 से 2022 तक के गुमला के तत्कालीन एसपी एवं अनुसंधानकर्ता को क्लीन चिट कैसे दे दिया. जबकि यह प्रीयोडिकल रिपोर्ट अनुसंधानकर्ता को मामले में FIR दर्ज होने के चार माह में लड़की के लापता रहने के बाद 3- 3 माह में भेजी जानी चाहिए थी.
 
फाइल फोटो
  • कोर्ट ने गृहविभाग एवं एसपी गुमला से मांगा जवाब,
  • गुमला से वर्ष 2018 लापता बच्ची का मामला

Ranchi News:  झारखंड हाईकोर्ट में गुमला से वर्ष 2018 से लापता बच्ची के मामले में सुनवाई हुई. मामले में प्रार्थी के जवाब का प्रतिउत्तर देते हुए सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया.  इसमें बताया गया कि लड़की के लापता रहने पर अनुसंधान की प्रीयोडिकल रिपोर्ट DLSA  गुमला को देर से भेजी गई है. अनुसंधानकर्ता ने 23 अक्टूबर 2026 को यह रिपोर्ट DLSA को भेजी है, इसके लिए कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी गई.

 

कोर्ट ने कहा कि प्रीयोडिकल रिपोर्ट देरी से भेजने के मामले पर वन मैन कमेटी ने क्यों विचार नहीं किया और वर्ष 2018 से 2022 तक के गुमला के तत्कालीन एसपी एवं अनुसंधानकर्ता को क्लीन चिट कैसे दे दिया. जबकि यह प्रीयोडिकल रिपोर्ट अनुसंधानकर्ता को मामले में FIR दर्ज होने के चार माह में लड़की के लापता रहने के बाद 3- 3 माह में भेजी जानी चाहिए थी. 

 

कोर्ट ने इस बिंदु पर गृहविभाग के माध्यम से सरकार को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले की मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा को 6 जून 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया है, उससे पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी के लिए आवेदन दिया गया है. जिसपर कोर्ट ने सवाल उठाया कि आरोपी की गिरफ्तारी के चार-पांच माह बाद पुलिस कस्टडी मांगना कहां तक उचित है? कोर्ट ने एसपी गुमला को जवाब दाखिल कर बताने को कहा है कि लड़की के गायब रहने के मामले में अनुसंधान ठीक से क्यों नहीं किया, अनुसंधान में ढीला रवैया क्यों अपनाया. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर ने पक्ष रखा. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी.  

इसे भी पढ़ें - 

 

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा था कि क्या पूर्व में जब लड़की चार माह से लापता थी तो उस समय अनुसंधान की प्रीयोडिकल रिपोर्ट  DALSA  गुमला को भेजी गई थी कि नहीं?

 

 इससे पहले प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर ने कोर्ट को बताया गया था कि  सरकार के शपथ पत्र में वर्ष 2018 से 2022 तक के गुमला के तत्कालीन एसपी एवं अनुसंधानकर्ता को क्लीन चिट दे दी गई है, जबकि  उस समय FIR भी देर से दर्ज किया गया था. सरकार की ओर से लड़की की लापता होने के संदर्भ में फैक्ट भी नहीं लाया गया है. 


मामले में सरकार की ओर से बताया गया कि मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा का गुजरात के गांधीनगर में जो सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट हुआ था, उसमें वह संदिग्ध पाई गई है.   

 

दरअसल पूर्व की सुनवाई में सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि स्वास्थ्य कारणों से मुख्य आरोपी का गुजरात के गांधीनगर में नार्को टेस्ट नहीं हो सका था. इसके बाद वहां उसके सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट सहित दो पूरक टेस्ट किए गए थे. 

 

उल्लेखनीय है कि सितंबर 2018 से गुमशुदा गुमला की 15 वर्षीय बच्ची को बरामद करने को लेकर उसकी मां चंद्रमुनि उराइन की ओर से दायर हेवियस कार्पस की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट कर रही है.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही