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JPSC 11वीं-13वीं, CDPO व FSO नियुक्ति रद्द मामला : HC ने कहा-तथ्यात्मक विश्लेषण कर कोर्ट आदेश पारित करेगी

Ranchi News : पिछली सुनवाई में JPSC  की ओर से कहा गया कि परीक्षा में सिस्टमैटिक अनियमितता हुई. अनुसंधान में यह साफ हो गया कि परीक्षा की स्वच्छता भंग हुई है. नियुक्ति में यह पता लगाना असंभव है कि कौन सफल अभ्यर्थी दोषी है और कौन निर्दोष है.
 
हाईकोर्ट
  • JPSC 11वीं-13वीं, CDPO व FSO नियुक्ति रद्द करने के मामले में सुनवाई पूरी, HC ने फैसला रखा सुरक्षित
  • JPSC 11वीं-13वीं, CDPO व FSO नियुक्ति रद्द करने के मामले में सरकार ने HC में रखा पक्ष
  • सरकार ने सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में पेश की
  • प्राथी एवं सरकार को शॉर्ट नोट प्रस्तुत करने का निर्देश

Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट में JPSC द्वारा आयोजित 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई आज हुई. सुनवाई पूरी होने के बाद हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. कोर्ट ने गुरुवार तक प्रार्थी और सरकार को संक्षिप्त लिखित नोट प्रस्तुत करने के का समय दिया है. 

 

इससे पहले अंतिम बहस पूरा होने के बाद कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति परीक्षा रद्द करने के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्पष्ट है. यह देखा जाएगा कि नियुक्ति परीक्षा रद्द की गई है, उसमें दोषी एवं निर्दोष को अलग-अलग कर सकते हैं या नहीं. या फिर सिस्टम इतनी ज्यादा पोल्यूट हो गई है कि दोषी एवं निर्दोष को अलग किया जाना असंभव है. प्रार्थी, हस्तक्षेपकर्ता और सरकार ने अपना-अपना पक्ष रख दिया है. अब कोर्ट तथ्यात्मक विश्लेषण कर मामले में अपना आदेश पारित करेगी. 

 

वहीं अंतिम बहस में आज प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा एवं अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट से कहा कि 11-13वीं  सिविल सेवा परीक्षा, फूड सेफ्टी ऑफिसर और सीडीपीओ की परीक्षा लेने वाली एजेंसी TDPL को गलत और दागदार साबित कर परीक्षा रद्द करना अनुचित है, क्योंकि TDPL के संदर्भ में अभी उसे अनियमितता की साजिश करने वाला नहीं बताया जा सकता, यह जांच का विषय है. मामले में अनुसंधान चल रहा है. प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि नियुक्ति हो जाने के बाद नियुक्ति रद्द करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया होनी चाहिए. सामूहिक रूप से नोटिफिकेशन जारी कर सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती है.

 

हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने कहा कि 11-13वीं सिविल सेवा परीक्षा और सीडीपीओ में परीक्षा लेने वाली एजेंसी TDPL ने 50-50 लाख लेकर कई अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराया. वहीं सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहित राय ने कोर्ट को बताया कि इन परीक्षाओं में अनियमितता के संकेत चार-पांच बिंदुओं से साफ हो गया है. इसके लिए पर्याप्त सबूत और दस्तावेज हैं. CID की जांच में कई गिरफ्तारियां हुई है, जिनसे इस परीक्षा में पैसे के लेनदेन की बात साबित हो रही है. सरकार की ओर से सीलबंद रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया. 

 

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पिछली सुनवाई में JPSC  की ओर से कहा गया कि परीक्षा में सिस्टमैटिक अनियमितता हुई. अनुसंधान में यह साफ हो गया कि परीक्षा की स्वच्छता भंग हुई है. नियुक्ति में यह पता लगाना असंभव है कि कौन सफल अभ्यर्थी दोषी है और कौन निर्दोष है.

 

कोर्ट को बताया कि CID के दस्तावेजों से साफ है कि नियुक्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है. परीक्षा में अनियमितता को देखते हुए सरकार को नियुक्ति  रद्द करने का अधिकार है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स एवं अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने पक्ष रखा. 

 


मामले में याचिकाकर्ता ने सरकार द्वारा सिविल सेवा परीक्षा-2023 (01/2024), फूड सेफ्टी ऑफिसर (18/2023) और सीडीपीओ (21/2023) नियुक्ति को रद्द करने को चुनौती दी गई है.

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