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हाईकोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने वापस लिया रिटायर्ड अफसर पर लगा दंड, अब सुप्रीम कोर्ट जाएगी

झारखंड सरकार ने पथ निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (गुण नियंत्रण) राज किशोर प्रसाद के खिलाफ कई साल पहले जारी दंडात्मक आदेश वापस ले लिए हैं. यह फैसला झारखंड हाईकोर्ट के आदेश और अवमानना मामले में अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद लिया गया है.
 
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Ranchi: झारखंड सरकार ने पथ निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (गुण नियंत्रण) राज किशोर प्रसाद के खिलाफ कई साल पहले जारी दंडात्मक आदेश वापस ले लिए हैं. यह फैसला झारखंड हाईकोर्ट के आदेश और अवमानना मामले में अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद लिया गया है. हालांकि सरकार ने साफ किया है कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करेगी. ऐसे में दंड वापस लेने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा.

 

यह मामला वर्ष 2008 का है. उस समय गिरिडीह में पदस्थापित रहने के दौरान राज किशोर प्रसाद पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी. उनपर मापी पुस्तिका (Measurement Book) और प्रयोगशाला के उपकरण गायब करने, बिना अनुमति जांच रिपोर्ट देने, सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने और बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने जैसे आरोप लगाए गए थे.

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जांच के बाद पथ निर्माण विभाग ने 23 सितंबर 2013 को उन्हें दंडित किया था. इसके बाद 28 अगस्त 2014 को उनकी विभागीय अपील भी खारिज कर दी गई थी. राज किशोर प्रसाद ने इन आदेशों को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी. 11 अप्रैल 2023 को हाईकोर्ट ने 2013 और 2014 के दोनों दंडात्मक आदेश रद्द कर दिए. इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ एलपीए दायर की, लेकिन 23 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया. अदालत ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दोषपूर्ण जांच करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का भी निर्देश दिया था.

 

हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर राज किशोर प्रसाद ने अवमानना याचिका दायर की. सुनवाई के दौरान 1 मई 2026 को अदालत ने सरकार को 17 जून 2026 तक आदेश लागू करने का अंतिम मौका दिया. अदालत ने यह भी कहा था कि आदेश का पालन नहीं होने पर पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा.

 

इसके बाद 21 जुलाई 2026 को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में फैसला लिया गया कि राज किशोर प्रसाद के खिलाफ जारी सभी दंडात्मक आदेश वापस लिए जाएं. इसी के आधार पर विभाग ने अधिसूचना जारी कर पुराने सभी दंड आदेश रद्द कर दिए. सरकार ने साथ ही यह भी तय किया है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की जाएगी. इसके लिए विधि विभाग के माध्यम से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद ही इस मामले का अंतिम परिणाम तय होगा.

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