Ranchi : देश में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज ने गहरी चिंता जताई है. आदिवासी संगठनों का कहना है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन लागू होने पर आदिवासी आरक्षित सीटों में कमी आ सकती है, जिससे समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकार प्रभावित होंगे.
इसी मुद्दे को लेकर 31 मई को रांची प्रेस क्लब में परिसीमन का आदिवासी समाज पर प्रभाव विषय पर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक और सेमिनार आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम में झारखंड के सभी 24 जिलों से सामाजिक अगुआ, बुद्धिजीवी, अधिवक्ता, शिक्षाविद, शोधकर्ता, छात्र-युवा प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे.
आयोजकों के अनुसार, परिसीमन केवल निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का मामला नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज के राजनीतिक अस्तित्व और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा गंभीर विषय है. उनका कहना है कि सामाजिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर परिसीमन लागू किया गया तो इसका सबसे बड़ा असर आदिवासी समाज पर पड़ेगा.
बैठक में आदिवासी आरक्षित सीटों की सुरक्षा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकार और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. साथ ही केंद्र सरकार के सामने हाई लेवल कमेटी गठन की मांग रखने पर भी विचार किया जाएगा, ताकि उसके सुझावों के आधार पर ही परिसीमन प्रक्रिया आगे बढ़े.
आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में आदिवासी सीटों में कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी. मांगों की अनदेखी होने पर व्यापक जनांदोलन की रूपरेखा तैयार करने की भी बात कही गई है.
कार्यक्रम 31 मई 2026 को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक रांची प्रेस क्लब, करमटोली में आयोजित होगा. आयोजकों ने सामाजिक संगठनों, छात्र-युवा साथियों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं और जागरूक नागरिकों से कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है.
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