Washington : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब इस दिशा में बढ़ चला है कि वहां से लौट पाना असंभव सा दिख रहा है. खबर है कि Strait of Hormuz में कमर्शियल जहाजों पर हमलों के कारण उनकी आवाजाही ठप होने से अमेरिका जंग पर नयी रणनीति बनाने में जुट गया है.
नयी रणनीति के तहत अमेरिका ने अपने भीमकाय एम्फीबियस असॉल्ट शिप यूएसएस त्रिपोली (LHA 7) को मिडिल ईस्ट की ओर रवाना कर दिया है. यूएसएस त्रिपोली तबाही मचानेवाले हथियारों, F-35B स्टील्थ फाइटर जेट्स, 2,000 से अधिक मरीन कमांडोज के साथ मिडिल ईस्ट आ रहा है.
खबर है कि इसके साथ अमेरिका ने युद्धपोत USS Boxer को भी भेजा है. जानकारी के अनुसार यूएसएस त्रिपोली पर अमेरिका की 31st मरीन एक्सपेडिशनरी तैनात है. जापान के ओकिनावा से रवाना हुई इस यूनिट में लगभग 2500 मरीन कमांडो और नेवी के नाविक शामिल हैं.
बता दें कि 31st MEU एक रैपिड-रिस्पॉन्स फोर्स है. यह फोर्स किसी भी संकट में तुरंत कार्रवाई करने के लिए जानी जाती है. यूएसएस त्रिपोली (LHA 7) की पहचान अमेरिका के तैरता हुआ सैन्य अड्डे के रूप में की जाती है. पारंपरिक युद्धपोतों से अलग इसे हवाई ऑपरेशन्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
बताया जाता है कि इस युद्धपोत की लंबाई 844 फीट है. इसका फुल-लोड डिस्प्लेसमेंट 45,000 से 50,000 टन के बीच है.इस पर अत्याधुनिक F-35B लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट्स, MV-22 Osprey टिल्ट-रोटर एयरक्राफ्ट और MH-60S सीहॉक हेलीकॉप्टर्स तैनात हैं.
यूएसएस त्रिपोली को होर्मुज का रास्ते खोलने और तेल टैंकरों सहित अन्य जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने में मदद करने की जिम्मेदारी दिये जाने की सूचना है.
अहम बात यह है कि इस क्षेत्र में पहले से ही USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford कैरियर मौजूद है. वार एक्सपर्ट्स के अनुसार मरीन कमांडोज को ईरान के अहम द्वीपों (खार्ग-केशम पर उतारने का विकल्प अमेरिका के पास है.
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