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Gumla News : गुमला के पुग्गू में 5 करोड़ से बनेगा धूमकुड़िया भवन, मंत्री चमरा लिंडा ने किया शिलान्यास

Gumla News: मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को समझने से ही उनके महत्व का एहसास होता है. आदिवासी समाज ने अपनी विरासत के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को पीछे छोड़ दिया है.
 
मंत्री चमरा लिंडा का स्वागत करते अधिकारी.

Gumla News : कार्तिक उरांव की जयंती पर गुरुवार को गुमला प्रखंड के पुग्गू गांव में वृहद धूमकुड़िया भवन का शिलान्यास हुआ. भवन का शिलान्यास झारखंड के मंत्री चमरा लिंडा ने शिलापट्ट का अनावरण कर किया. राज्य संपोषित योजना के तहत बनने वाले इस भवन पर 4,99, 72,500 रुपये लागत आयेगी.

 

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प्रस्तावित धूमकुड़िया भवन को आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और युवाओं के शैक्षणिक विकास के उद्देश्य से बहुउद्देशीय रूप में विकसित किया जाएगा. भूतल पर प्रशिक्षण हॉल बनेगा, जहां मांदर, ढोल, नगाड़ा, झांझ और घंट जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्र उपलब्ध रहेंगे. इसके माध्यम से नई पीढ़ी को पारंपरिक संगीत और नृत्य का प्रशिक्षण दिया जाएगा.
भवन के ऊपरी तल पर विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर की व्यवस्था होगी. इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को सुविधा मिलेगी. इसके अलावा सामाजिक कार्यक्रमों और विवाह समारोहों के आयोजन के लिए विशाल विवाह हॉल का भी निर्माण किया जाएगा.


संस्कृति और परंपराओं को सहेजना सामूहिक जिम्मेदारी: चमरा लिंडा

समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को समझने से ही उनके महत्व का एहसास होता है. आदिवासी समाज ने अपनी विरासत के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को पीछे छोड़ दिया है. उन्हें फिर से जीवंत करने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना जरूरी है. भाषा, रीति-रिवाज, पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्र आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान हैं. इनका संरक्षण करना सभी का सामूहिक दायित्व है.


मंत्री ने कहा कि पारंपरिक धूमकुड़िया व्यवस्था केवल एक भवन या स्थान नहीं थी, बल्कि युवाओं को सामाजिक व्यवहार, सामुदायिक जीवन और सांस्कृतिक मूल्यों की शिक्षा देने का माध्यम थी. सरकार का प्रयास है कि धूमकुड़िया भवन के माध्यम से संस्कृति संरक्षण और शिक्षा, दोनों को एक साथ बढ़ावा मिले.


उन्होंने कहा कि युवा पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोककलाओं को सीखने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनें तथा समाज और क्षेत्र का नाम रोशन करें.


इससे पूर्व अतिथियों ने बाबा कार्तिक उरांव के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. समारोह में जिला परिषद अध्यक्ष किरण माला बाड़ा, डीडीसी अनिमेष रंजन, परियोजना निदेशक आईटीडीए, जिला कल्याण पदाधिकारी समेत अन्य पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.


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