Gumla News: जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खलखो की अध्यक्षता और जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आरती कुमारी की उपस्थिति में शिक्षा विभाग की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक हुई. बैठक में कल्याण विभाग के प्रतिनिधि एवं पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि सहित झारखंड शिक्षा परियोजना गुमला के एडीपीओ ज्योति खलखो, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी घनश्याम चौबे, सभी सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, फील्ड मैनेजर, बीआरपी सीआरपी, लेखापाल एवं एमआईएस समन्वयक उपस्थित रहे.
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बैठक में विद्यालयों में छात्र एवं शिक्षक उपस्थिति को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इसकी नियमित एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया. डीईओ ने निर्देश दिया कि विद्यालय स्तर पर शिक्षकों की दो बार उपस्थिति और दैनिक रूप से ऑनलाइन छात्र उपस्थिति में किसी प्रकार की लापरवाही न हो तथा संबंधित प्रविष्टियों को प्रतिदिन निर्धारित समय पर पूर्ण किया जाए.
छात्रवृत्ति योजनाओं की समीक्षा के क्रम में डीईओ कविता खलखो एवं डीएसडब्लूओ आरती कुमारी ने विशेष निर्देश देते हुए कहा कि कक्षा 8 से 12 तक की सभी श्रेणी की बालिकाओं के लिए सावित्रीबाई फुले छात्रवृत्ति योजना तथा कक्षा 1 से 10 तक एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के बालक-बालिकाओं के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति से संबंधित सभी पात्र विद्यार्थियों का विवरण संबंधित पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करना सुनिश्चित किया जाए.
एडीपीओ द्वारा बैठक में शिक्षा विभाग के विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक सूचकांकों की विस्तृत समीक्षा करते हुए यूडायस, अपार आईडी, स्टूडेंट पेन नम्बर आदि की अनिवार्य प्रविष्टि, आधार पंजीकरण/अपडेशन एवं वैलिडेशन तथा ईविद्यावाहिनी पोर्टल में विभिन्न गतिविधियों की प्रविष्टि, मध्याह्न भोजन योजना संचालन, विद्यालय प्रबंधन समिति का पुनर्गठन, प्रशस्त ऐप, रेल टेस्ट तथा स्प्लिट सिलेबस के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए.
पर्यावरण संरक्षण एवं विद्यालयों को स्वच्छ-हरित बनाने के उद्देश्य से इको क्लब के अंतर्गत पौधरोपण अभियान को प्रभावी बनाने तथा स्वच्छ एवं हरित विद्यालय के अंतर्गत पोर्टल पर ऑनलाइन नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए.
जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खलखो ने सभी प्रखंड एवं संकुल स्तरीय पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि जिला स्तर से प्राप्त निर्देशों का अनुपालन केवल पोर्टल प्रविष्टि तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रत्यक्ष प्रभाव विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति, सीखने के स्तर, शैक्षणिक वातावरण एवं योजनाओं के लाभ की पहुंच में दिखाई देना चाहिए.
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