Chainpur: संसद के मानसून सत्र में परिसीमन बिल आने की संभावना को देखते हुए झारखंड में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है. इसी सिलसिले में चैनपुर पहुंचे झारखंड प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने प्रेस वार्ता कर झारखंड के आदिवासी और एससी (अनुसूचित जाति) सीटों के संरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है.
बंधु तिर्की ने आशंका जताई कि यदि मानसून सत्र में परिसीमन बिल आता है और 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाता है, तो झारखंड में आदिवासियों और अनुसूचित जातियों (एससी) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या में कमी आ सकती है. उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी जब ऐसी स्थिति बनी थी तब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर सभी पक्षों के नेताओं ने इसका पुरजोर विरोध किया था जिसके बाद उस प्रक्रिया को रोक दिया गया था.
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नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि झारखंड की मूल पहचान जल, जंगल और जमीन की भाषा पर आधारित है इसलिए किसी भी कीमत पर आदिवासियों और एससी की सीटें कम नहीं होनी चाहिए, बल्कि इन्हें बढ़ाया जाना चाहिए
इस मुद्दे को लेकर झारखंड हाईकोर्ट के महाधिवक्ता सुभाषिष सोरेन और रामचंद्र उरांव के नेतृत्व में एक लीगल ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन किया गया है. अगले दो-चार दिनों में इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा. इसके बाद, विपक्षी दल के प्रमुख नेता राहुल गांधी से मिलकर एक प्रतिनिधिमंडल इस पूरे मामले की पूरी रूपरेखा और ब्रीफिंग करेगा.
आदिवासियों और पिछड़ों के अधिकारों तथा उनके अस्तित्व की इस लड़ाई को जन-जन तक पहुंचाने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में एक विशाल आदिवासी एकता महाजुटान रैली का आयोजन किया गया है.
इस रैली की मुख्य प्रवक्ता शशि पन्ना और अन्य नेताओं ने राज्य के तमाम आदिवासी और एससी समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे अपनी संख्या बल के साथ इस रैली में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, क्योंकि यह लड़ाई सीधे तौर पर उनके अस्तित्व और भविष्य के प्रतिनिधित्व से जुड़ी हुई है. इस अवसर पर चैनपुर में मुख्य रूप से जिप सदस्य मेरी लकड़ा, सुशील दीपक मिंज, अल्बर्ट तिग्गा और प्रमोद खलखो सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.
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