बताया जाता है कि चारों तब से हजारीबाग में सक्रिय हैं, जब से नए पुलिस अधीक्षक हजारीबाग में आये हैं. हालांकि उनसे चारों के संबंध किस स्तर का है, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है. लेकिन थानों की पुलिस उन चारों के इशारे पर काम करती है, इसकी पुष्टि हुई है. कुछ लोगों का दावा है कि उनके असली नाम और तस्वीर भी जल्द सामने आ सकते हैं.
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चारों के फर्जी नाम व उनके करतूत सामने आने की वजह यह है कि चारों ने पिछले 15-20 दिनों के भीतर हजारीबाग में कोहराम मचा रखा है. चारों ने हजारीबाग जिला में वैध-अवैध काम करने वालो से करोड़ों रुपये की वसूली कर ली है. जिनसे वसूली हुई, उनमें अधिकांश हैरान-परेशान हैं.
लॉटरी, सट्टा, ड्रग्स, कोयला, पत्थर, बालू, मवेशी हर तरह के अवैध कारोबारियों से वसूली की गई है. पर चरही के संदीप व प्रभात को छोड़ अधिकांश के काम अटके पड़े हैं. इसकी वजह एक ही काम और एक ही जगह के लिए अलग-अलग लोगों से वसूली कर लिया जाना है. इस कारण इस बार सबके नाम खुल कर सामने आने लगे हैं.
हजारीबाग की मीडिया खबर कर रही है. सोशल मीडिया पर पोस्ट हो रहे हैं. तब मीडिया का मुंह बंद करने के लिए तमाम तरह के तिकड़म लगाये जा रहे हैं. यहां तक की धमकी दी जा रही है. हत्या करने की धमकी दी जा रही है. धमकी के केस थाना में दर्ज हो रहा है.
इन सबके बीच पुलिस अधीक्षक अमन कुमार मौन हैं. उन्होंने अब तक इन चर्चाओं, मीडिया की खबरों, दर्ज प्राथमिकी को लेकर सार्वजनिक रुप से कुछ नहीं कहा है. बड़ा सवाल यह है कि क्या हजारीबाग के एसपी उन चारों की करतूतों की जांच करायेंगे? उनके मौन रहने को लोग उनकी सहमति के रुप में देख रहे हैं. वैसे चर्चा प्रक्रिया का पालन किये बिना थानेदारों के तबादले को लेकर भी है.
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