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हजारीबाग : विष्णुगढ़ में 15वें वित्त आयोग की योजनाओं में 70 लाख की कथित हेराफेरी, जांच की मांग

  • हजारीबाग डीसी को किए गए शिकायत में कहा कि फर्जी नाम से राशि की निकासी की गई

Hazaribagh :  जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड में 15वें वित्त आयोग मद से संचालित योजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि के गबन का गंभीर मामला सामने आया है. अधिवक्ता पवन कुमार यादव ने हजारीबाग डीसी से इस संबंध में शिकायत की है, जिसमें करीब 70 लाख रुपये की अवैध निकासी का आरोप लगाया गया है.

 

शिकायत के अनुसार, पंचायत समिति स्तर पर संचालित योजनाओं में नियमों को दरकिनार करते हुए फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान किया गया. सरकारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, “लाभुक समिति” के माध्यम से भुगतान होना चाहिए था.

 

लेकिन कथित रूप से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर एक ही वेंडर को पूरा भुगतान कर दिया गया.

 

फर्जी मस्टर रोल और ‘घोस्ट लेबर’ का खेल 

शिकायत के अनुसार, प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रमुख, जूनियर इंजीनियर और वेंडर के बीच आपराधिक साठगांठ से लाभुक समिति को दरकिनार कर एक ही ठेकेदार मनवा इंटरप्राइजेज को अनियमित भुगतान किया गया.

 

झारखंड पंचायती राज विभाग की अधिसूचना संख्या 2 गौ० यो०-8/2020/1551 (25 सितंबर 2020) की कंडिका 8.1 का स्पष्ट उल्लंघन हुआ, जहां बैंक खाते से भुगतान अनिवार्य है. मास्टर रोल में फर्जी मजदूरों जैसे आनंद कुमार (विदेश गए), प्रमोद कुमार, गोंदिया देवी और अनीता देवी के नाम दर्ज कर जाली हस्ताक्षर किए गए .

 

मस्टर रोल में कई ऐसे नाम दर्ज पाए गए हैं, जो कार्यस्थल पर मौजूद ही नहीं थे. आरोप है कि कनीय अभियंता और संबंधित अधिकारियों ने मिलकर फर्जी हस्ताक्षर के जरिए सरकारी राशि की निकासी की. शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ व्यक्तियों के नाम का दुरुपयोग कर रकम निकाली गई, जबकि वे योजना अवधि में क्षेत्र में मौजूद ही नहीं थे.

 

गंभीर धाराओं में कार्रवाई की मांग  

शिकायत में तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, पंचायत समिति प्रमुख, कनीय अभियंता और संबंधित वेंडर के बीच “आपराधिक गठजोड़” होने की आशंका जताई गई है. इन सभी पर सरकारी धन के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है.

 

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले को आपराधिक षड्यंत्र बताते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की विभिन्न धाराओं जैसे आपराधिक विश्वासघात, कूटरचना और फर्जी दस्तावेज के उपयोग के तहत कार्रवाई की मांग की गई है.

 

साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष विभागीय जांच कर दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई की अपील की गई है.

 

 

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