Chauparan/Hazaribagh: मानसून की पहली हल्की बारिश ने चौपारण में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है. महज कुछ घंटों की बारिश ने जीटी रोड (एनएच-19) समेत बजरंग टोला, पडरिया, भगहर और कई अन्य मोहल्लों एवं गांवों को जलमग्न कर दिया. सड़कों पर जलजमाव और कीचड़ के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया. कई स्थानों पर बारिश का पानी घरों में घुस जाने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

चौपारण में जलजमाव
बारिश के बाद चौपारण की कई सड़कें तालाब जैसी नजर आईं. ग्रामीण इलाकों की कच्ची सड़कें कीचड़ में तब्दील हो गईं, वहीं पक्की सड़कों पर पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित रहा. स्कूली बच्चों को विद्यालय पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और कई परिवार घंटों तक अपने घरों में ही कैद रहने को मजबूर हो गए.
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स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत स्तर पर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बरसात की पहली फुहार ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी है. यदि पंचायतों में समय पर सड़क और नाली निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराए गए होते तो आज लोगों को जलजमाव और कीचड़ जैसी समस्याओं से जूझना नहीं पड़ता. बरसात ने यह साफ कर दिया है कि कई जगहों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी बना हुआ है.
वहीं, एनएच-19 पर भी जल निकासी की व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है. जीटी रोड पर कई स्थानों पर पानी जमा होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्य के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई. कई जगह नालियों का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है, जबकि जहां नालियां बनाई गई हैं, वहां भी उनकी डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं.
लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि कुछ घंटों की बारिश ही विकास कार्यों की पोल खोल दे, तो संबंधित एजेंसियों की कार्यशैली की समीक्षा होना आवश्यक है. बरसात अभी शुरू ही हुई है. यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
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