
मुख्य द्वार के बाहर ठेला लगाकर सामान बेच रहे दुकानदार
इस संबंध में बताया जा रहा है कि अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में वाहन खड़े किए जा रहे थे. कई लोग बाजार आने के दौरान अपनी गाड़ियां अस्पताल परिसर में पार्क कर चले जाते थे, जिससे अस्पताल परिसर में अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो रही थी. इसी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने यह कदम उठाया है.
हालांकि गेट बंद होने के बाद अस्पताल के दूसरे प्रवेश द्वार पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल परिसर में वाहनों के अनधिकृत पार्किंग की समस्या थी तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी, न कि मुख्य गेट को ही बंद कर देना था. लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द इस गेट को पुनः खोलने की मांग की है.
गौरतलब है कि पिछली बार हजारीबाग दौरे पर आए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इसी गेट को लेकर कहा था कि वह अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार का स्वरूप बदलना चाहते हैं. उनका मानना था कि इतने बड़े अस्पताल का गेट उसकी गरिमा के अनुरूप नहीं दिखता और लोगों को यह समझने में भी कठिनाई होती है कि यह अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार है. ऐसे में जिस गेट को बेहतर और आकर्षक बनाने की बात कही गई थी, वही गेट फिलहाल बंद कर दिया गया है, जिससे लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
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