Hazaribagh News: चौपारण के भगहर सुरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और लकड़ी तस्करी का मामला एक बार फिर सामने आया है. गुरुवार को वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर को जब्त किया. ट्रैक्टर के डाला में विभिन्न प्रजातियों की कच्ची लकड़ियां लदी मिली. इस कार्रवाई के बाद सुरक्षित वन क्षेत्र में चल रहे कथित अवैध कारोबार और जंगल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि भगहर सुरक्षित वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई कर लकड़ियों को ट्रैक्टर पर लादकर बाहर ले जाने की तैयारी की जा रही है. सूचना मिलते ही वरीय अधिकारियों को अवगत कराया गया. इसके बाद प्रभारी वनपाल अमन कुमार उर्फ प्यारे लाल के नेतृत्व में विभागीय टीम ने मौके पर छापेमारी की.
वन विभाग की टीम को देखते ही ट्रैक्टर चालक वाहन छोड़कर भागने लगा. वनकर्मियों ने उसका काफी दूर तक पीछा किया, लेकिन जंगल और झाड़ियों का लाभ उठाकर वह फरार हो गया. इसके बाद टीम ने लकड़ी समेत ट्रैक्टर को जब्त कर रेंज कार्यालय पहुंचाया.
प्रभारी वनपाल अमन कुमार उर्फ प्यारे लाल ने बताया कि वन संपदा की अवैध कटाई और तस्करी के खिलाफ विभाग लगातार अभियान चला रहा है. जब्त ट्रैक्टर के आधार पर संबंधित लोगों की पहचान की जा रही है. परसातरी भगहर निवासी श्री यादव की संलिप्तता के बिंदु पर भी जांच की जा रही है. आरोपियों के विरुद्ध वन अधिनियम के तहत वन वाद दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
इधर, इस कार्रवाई के बाद भगहर के सुरक्षित वन क्षेत्र में जंगल की वास्तविक स्थिति को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जंगल के भीतर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के साथ-साथ अवैध रूप से मकान निर्माण और वन भूमि पर कब्जा किया जा रहा है.
आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि वन विभाग की कार्रवाई अक्सर छोटी-मोटी जब्ती तक सीमित रह जाती है, जबकि जंगल के भीतर हो रहे कथित अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है. सबसे गंभीर आरोप कुछ वनकर्मियों की कथित मिलीभगत को लेकर भी लगाए जा रहे हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है.
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सुरक्षित वन क्षेत्र में लगातार अवैध कटाई और अतिक्रमण हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या विभाग को जंगल की नियमित निगरानी की जानकारी नहीं है या फिर कार्रवाई केवल सूचना मिलने पर ही की जाती है, अब जरूरत केवल एक ट्रैक्टर जब्त करने तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि भगहर सुरक्षित वन क्षेत्र की उच्चस्तरीय जांच कराने की है.
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