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Hazaribagh : चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए निकला टेंडर, AG सख्त, उच्चस्तरीय जांच शुरू

ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर घोटाले की गूंज एक बार फिर तेज हो गई है. हजारीबाग ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) की एक निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं. विभागीय जांच में कथित शिथिलता के बाद महालेखाकार (AG), झारखंड ने मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है. यह कार्रवाई आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता शनिकांत की शिकायत पर की गई है. शिकायत में टेंडर प्रक्रिया में कई अनियमितताओं के दस्तावेजी साक्ष्य सौंपे गए हैं.
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हजारीबाग जिले की खबरें

Ranchi :  ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर घोटाला का मामला एक बार फिर चर्चा में है. हजारीबाग ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) की एक निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं. विभागीय जांच में कथित शिथिलता के बाद महालेखाकार (AG), झारखंड ने मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है.

 

यह कार्रवाई आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता शनिकांत की शिकायत पर की गई है. शिकायत में टेंडर प्रक्रिया में कई अनियमितताओं के दस्तावेजी साक्ष्य सौंपे गए हैं.

 

क्या है पूरा मामला 

ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) को सौंपे गए साक्ष्यों के अनुसार, कार्यपालक अभियंता कार्यालय, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, हजारीबाग द्वारा एक ई-अल्पकालीन निविदा आमंत्रण सूचना (ई-निविदा सं. 05/2025-26/RWD/EE/HAZARIBAG) जारी की गई थी.

 

इसके तहत केरेडारी प्रखंड के लवनिया मोड़ से जोरदाग रोड तक पथ व गार्डवाल निर्माण कार्य (लंबाई 2.000 किमी) के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं. इस काम की अनुमानित लागत इस 4,99,77,900 निर्धारित की गई थी.

 

जानकारों के अनुसार, लागत जानबूझकर 5 करोड़ रुपये से मात्र 22,100 कम रखी गई थी, ताकि उच्च स्तर की तकनीकी जांच और अनुमोदन (मंजूरी) से बचा जा सके.


सिर्फ 7 दिन में मांगी गई निविदा

शिकायत के अनुसार, टेंडर 20 फरवरी को प्रकाशित हुई और आवेदन की अंतिम तिथि 27 फरवरी रखी गई. यानी संवेदकों (ठेकेदारों) को सिर्फ 7 दिन का समय मिला. इस बीच रविवार और नगर निकाय चुनाव होने के कारण प्रभावी समय और भी कम रह गया. ऐसे में प्रभावी कार्य दिवस केवल 4 से 5 दिन ही बचे, जो नियमों का उल्लंघन बताया गया है.

 

चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि समय सीमा जानबूझकर कम रखी गई, ताकि दूसरे योग्य संवेदक भाग नहीं ले सकें और एक विशेष ठेकेदार को लाभ मिल सके. इसे खुली प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के सिद्धांतों के खिलाफ बताया गया है.

रेलवे साइडिंग से भी जुड़ा है मामला

बताया जा रहा है कि यह सड़क कोयला परियोजनाओं की रेलवे साइडिंग तक जाने वाला प्रमुख मार्ग है. अब जांच में यह भी देखा जाएगा कि इस सड़क के निर्माण के लिए सभी जरूरी मंजूरियां और अनुमति ली गई थीं या नहीं.

ED की कार्रवाई के बाद भी सवाल

ग्रामीण विकास विभाग पहले भी टेंडर घोटाले को लेकर चर्चा में रहा है. इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है. इसके बावजूद विभाग में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं.

 

AG की जांच से बढ़ी अधिकारियों की चिंता

विभागीय जांच में कथित ढिलाई के बाद अब महालेखाकार कार्यालय ने सीधे जांच शुरू की है. जानकारी के अनुसार, विशेष ऑडिट में निविदा की तकनीकी प्रक्रिया, लागत निर्धारण, कार्यपालक अभियंता के कार्यकाल में जारी अन्य टेंडर, नियमों के पालन की स्थिति सहित अन्य बिंदुओं की जांच होगी. 

 

शिकायत में दोषी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की भी मांग की गई है.

 

 

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