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HC ने गृह सचिव व JSSC सचिव को जारी किया अवमानना नोटिस, जानें क्या है HC का आदेश

Ranchi News: कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल कर जवाब देने का निर्देश दिया है. जवाब की अग्रिम प्रति अमिकस क्यूरी मनोज टंडन को देने को कहा गया है. मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गयी है.
 
फाइल फोटो
  • कोर्ट के आदेश की लगातार अनदेखी पर कोर्ट सख्त 

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने कोर्ट के आदेशों का समयबद्ध अनुपालन नहीं करने और बार-बार समय विस्तार मांगने पर राज्य की गृह सचिव वंदना दादेल और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने उक्त दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ Contempt of Courts Act, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए.


कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल कर जवाब देने का निर्देश दिया है. जवाब की अग्रिम प्रति अमिकस क्यूरी मनोज टंडन को देने को कहा गया है. मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गयी है.

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कोर्ट के आदेशों का अनुपालन करने से बच रहे हैं सरकार व जेएसएससी

खंडपीठ ने आज जेल में सुधार सहित छह जनहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की. कहा कि राज्य सरकार और जेएसएससी लगातार कोर्ट के आदेशों का अनुपालन करने से बच रहे हैं. हर बार समय विस्तार के लिए आवेदन दाखिल किया जाता है और इसके लिए नियमित एवं सामान्य कारण बताए जाते हैं. कोर्ट ने कहा कि सुनवाई की तारीख से ठीक पहले ऐसे आवेदन दाखिल किए जाते हैं.

 

एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने पर कोर्ट नाराज

कोर्ट ने कहा कि अधिकांश मौकों पर जेएसएससी के अधिकारी राज्य सरकार के अधिकारियों को और राज्य सरकार के अधिकारी जेएसएससी को जिम्मेदार ठहराते हैं. इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच दोनों मिलकर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की जिम्मेदारी समस्याएं गिनाना नहीं, बल्कि उनका समाधान निकालना है.


खंडपीठ ने 25 जून 2026 के अपने आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें गृह सचिव और जेएसएससी के सचिव को मामले को गंभीरता से लेने और कोर्ट द्वारा निर्धारित समय-सीमा में आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया था. उस समय दोनों पक्षों की ओर से आश्वासन दिया गया था कि 1 अक्टूबर तक आदेश का अनुपालन कर दिया जाएगा और इसके बाद किसी तरह की नरमी की मांग नहीं की जाएगी.

 

आश्वासन के बावजूद फिर वही रवैया

कोर्ट ने कहा कि 25 जून के स्पष्ट आदेश के बावजूद गृह सचिव और जेएसएससी सचिव ने लगभग उसी तरह का रवैया दोहराया है. खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह आचरण कोर्ट के आदेश के साथ-साथ कोर्ट के समक्ष दिए गये गंभीर आश्वासन और अंडरटेकिंग का जानबूझकर उल्लंघन प्रतीत होता है.


इसी आधार पर दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. हालांकि  कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अगली तारीख पर दोनों अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है.

 

समय विस्तार के आवेदन खारिज, जेएसएससी को 30 नवंबर तक मोहलत

खंडपीठ ने राज्य सरकार और जेएसएससी की ओर से दाखिल समय विस्तार के आवेदनों को भी खारिज कर दिया. कोर्ट ने इन आवेदनों में दिए गये कारणों को छोटा और नियमित बताया. हालांकि राज्य सरकार द्वारा मांगे गये लगभग छह सप्ताह के अतिरिक्त समय को परिस्थितिवश स्वीकार किया गया.


वहीं जेएसएससी ने पांच महीने का अतिरिक्त समय मांगा था. कोर्ट ने इसके कारणों को भी स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि जेएसएससी को 1 अप्रैल 2026 के आदेश के पैरा 14 और 15 में दिए निर्देशों का अनुपालन 30 नवंबर 2026 तक हर हाल में करना होगा.

 

कोर्ट ने राज्य सरकार और जेएसएससी के अधिवक्ताओं को दोनों अधिकारियों तक आज के आदेश की जानकारी तत्काल पहुंचाने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को फिर होगी.

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